पहली बार वोट डालने वाले युवाओं को मिलेगा 'हलवा', केरलम में चुनाव आयोग की अनोखी पहल

केरलम विधानसभा चुनाव में युवाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए निर्वाचन आयोग ने 'वोट स्वीटेंड केरल अभियान' शुरू किया है. इसके तहत 9 अप्रैल को पहली बार मतदान करने वाले युवाओं को चुनिंदा बूथों पर हलवा दिया जाएगा.

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Kanhaiya Kumar Jha

नई दिल्ली: केरलम में आगामी 9 अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर निर्वाचन आयोग ने एक बेहद दिलचस्प और सराहनीय पहल की है. राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी रतन यू केलकर ने 'वोट स्वीटेंड केरल अभियान' का बिगुल फूंका है. इस अभियान का मुख्य उद्देश्य पहली बार मतदान करने जा रहे युवा वोटर्स को लोकतंत्र के इस महापर्व में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए प्रेरित करना है. 29 मार्च को इस बाबत जारी सरकारी आदेश ने स्पष्ट कर दिया है कि आयोग युवाओं के पहले मतदान अनुभव को यादगार बनाने के लिए प्रतिबद्ध है.

आयोग के निर्देशानुसार, राज्य के विभिन्न जिलों में कुछ विशेष पोलिंग स्टेशनों का चयन किया गया है जहां नए मतदाताओं को खास तौर पर पैक किया गया हलवा वितरित किया जाएगा. इस पहल को इस तरह डिजाइन किया गया है कि मतदान का अनुभव युवाओं के लिए केवल एक औपचारिकता न रहकर एक उत्सव जैसा लगे. इस कार्यक्रम के लिए जिला निर्वाचन अधिकारियों (DEO) के कार्यालयों में हलवे के 200 पैकेट भेजे जाएंगे. अब यह जिला अधिकारियों पर निर्भर करेगा कि वे अपने अधिकार क्षेत्र के किन बूथों पर इस मीठी सौगात का वितरण सुनिश्चित करते हैं.

बीएलओ और स्वयंसेवकों का कड़ा पहरा 

इस पूरी मुहिम की सफलता की कमान बूथ स्तर के अधिकारियों (BLO) और वालंटियर्स के हाथों में होगी. उन्हें विशेष रूप से प्रशिक्षित किया जा रहा है ताकि वे पहली बार वोट देने वाले मतदाताओं की पहचान कर सकें और उन्हें बिना किसी बाधा के हलवे के पैकेट भेंट कर सकें. आयोग ने कड़े निर्देश दिए हैं कि इस वितरण प्रक्रिया के कारण मतदान की मुख्य कार्यवाही में कोई व्यवधान नहीं आना चाहिए. यदि आवश्यकता पड़ी, तो बीएलओ की सहायता के लिए अतिरिक्त वालंटियर्स की तैनाती भी की जा सकती है ताकि प्रक्रिया सुगम और तेज बनी रहे.

जागरूकता के लिए डिजिटल माध्यम का उपयोग 

निर्वाचन आयोग इस पहल के जरिए एक बड़ा संदेश भी देना चाहता है. जिला निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे हलवा वितरण की संक्षिप्त फोटोग्राफी और वीडियो रिकॉर्डिंग की व्यवस्था करें. इस सामग्री का उपयोग बाद में चुनाव आयोग द्वारा जागरूकता अभियानों और आधिकारिक रिपोर्टिंग के लिए किया जाएगा. यह दस्तावेजीकरण न केवल युवाओं के उत्साह को दर्शाएगा, बल्कि भविष्य में होने वाले चुनावों के लिए भी एक प्रेरक उदाहरण बनेगा. केरल का यह 'मीठा प्रयोग' निश्चित रूप से चुनावी माहौल में नई ऊर्जा फूंकने का काम करेगा.