सोनम वांगचुक की हिरासत रद्द, लेह में हुए विरोध प्रदर्शनों के महीनों बाद सरकार का बड़ा फैसला
जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को पिछले सितंबर में लेह में हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत हिरासत में लिया गया और राजस्थान की जोधपुर जेल में रखा गया.
गृह मंत्रालय ने शनिवार को घोषणा की कि सरकार ने जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी रद्द करने का फैसला किया है. वांगचुक को पिछले साल सितंबर में लेह में हुई हिंसा के सिलसिले में हिरासत में लिया गया था. यह घटनाक्रम वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत हिरासत में लिए जाने और बाद में राजस्थान की जोधपुर जेल भेजे जाने के कुछ महीनों बाद सामने आया है. सरकार ने कहा कि हिंसक प्रदर्शनों के बाद 'सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए' वांगचुक को हिरासत में लिया गया था.
'लद्दाख में शांति, स्थिरता और आपसी विश्वास का माहौल'
सरकार ने अपने बयान में कहा 'सरकार लद्दाख में शांति, स्थिरता और आपसी विश्वास का माहौल बनाने के लिए प्रतिबद्ध है ताकि सभी हितधारकों के साथ रचनात्मक और सार्थक संवाद स्थापित किया जा सके. इस उद्देश्य को आगे बढ़ाते हुए और उचित विचार-विमर्श के बाद, सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत उपलब्ध शक्तियों का प्रयोग करते हुए श्री सोनम वांगचुक की हिरासत को तत्काल प्रभाव से रद्द करने का निर्णय लिया है'.
आकांक्षाओं और चिंताओं' का समाधान
सरकार ने आगे कहा कि वह लद्दाख में हितधारकों और सामुदायिक नेताओं के साथ बातचीत कर रही है ताकि 'क्षेत्र के लोगों की आकांक्षाओं और चिंताओं' का समाधान किया जा सके.
इसमें कहा गया है 'हालांकि, बंद और विरोध प्रदर्शनों का मौजूदा माहौल समाज के शांतिप्रिय चरित्र के लिए हानिकारक रहा है और इसने छात्रों, नौकरी के इच्छुक लोगों, व्यवसायों, टूर ऑपरेटरों और पर्यटकों सहित समुदाय के विभिन्न वर्गों और समग्र अर्थव्यवस्था को प्रतिकूल रूप से प्रभावित किया है'.
केंद्र सरकार का आरोप
केंद्र सरकार ने पहले कहा था कि वांगचुक ने जनरेशन Z को नेपाल और बांग्लादेश जैसे विरोध प्रदर्शनों के लिए उकसाने की कोशिश की थी. उनकी पत्नी गीतांजलि जे. आंगमो ने राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत वांगचुक की हिरासत को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसमें उनकी हिरासत को अवैध और उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करने वाला मनमाना कदम बताया गया था. उन्होंने यह भी कहा कि वांगचुक ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर हिंसा की निंदा की थी और स्पष्ट रूप से कहा था कि हिंसा लद्दाख की पांच साल पुरानी तपस्या और शांतिपूर्ण साधना को विफल कर देगी.
कोर्ट ने क्या कहा?
मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि वह जेल में बंद जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के भाषणों के वीडियो इस सप्ताह देखेगा और उनकी पत्नी गीतांजलि जे एंग्मो द्वारा राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत उनकी हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका पर 17 मार्च को अंतिम सुनवाई करेगा.
वांगचुक की गिरफ्तारी
लद्दाख को राज्य का दर्जा देने और छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर हुए हिंसक प्रदर्शनों के दो दिन बाद वांगचुक को गिरफ्तार किया गया. इन प्रदर्शनों में केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में चार लोगों की मौत हो गई और 90 लोग घायल हो गए. सरकार ने उन पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाया था.