‘मिडिल क्लास को खुलेआम लूटा जा रहा’, जाते-जाते बीजेपी को दर्द दे गए शहजाद पूनावाला
शहजाद पूनावाला ने बीजेपी से इस्तीफा दे दिया है. इस्तीफा देने से एक दिन पहले शहजाद पूनावाला ने टैक्स और महंगाई के बोझ पर सवाल उठाए. उन्होंने मध्यम वर्ग के लिए राहत की मांग की.
बीजेपी नेता शहजाद पूनावाला ने पार्टी के प्रवक्ता पद से आधिकारिक इस्तीफे की घोषणा से ठीक एक दिन पहले मध्यम वर्ग की आर्थिक परेशानियों को लेकर खुलकर अपनी बात रखी. सोशल मीडिया पहल ‘द मेनिफेस्टो’ के तहत जारी वीडियो में उन्होंने टैक्स व्यवस्था और सार्वजनिक सुविधाओं के बीच कथित असंतुलन पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि आम मध्यम वर्ग लगातार अलग-अलग तरह के कर चुका रहा है, लेकिन बदले में उसे पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिल रही हैं.
‘ATM बन गया है मिडिल क्लास’
पूनावाला ने अपने वीडियो में कहा कि भारतीय मध्यम वर्ग सरकार के लिए एक तरह के ‘ATM’ में बदल गया है. उनके मुताबिक लोग इनकम टैक्स के अलावा अप्रत्यक्ष कर और टोल भी देते हैं. इसके बावजूद खराब सड़कें, कमजोर बुनियादी ढांचा, शिक्षा व्यवस्था की चुनौतियां और भ्रष्टाचार जैसी समस्याएं बनी हुई हैं. उन्होंने सवाल किया कि क्या टैक्स देने वाले लोगों को उनके योगदान के अनुरूप सार्वजनिक सेवाएं मिल रही हैं.
सड़क, स्कूल और स्वास्थ्य पर सवाल
बीजेपी नेता ने टैक्स के बदले मिलने वाली सुविधाओं पर कई सवाल खड़े किए. उन्होंने खराब सड़कों, सरकारी स्कूलों की स्थिति, जर्जर इंफ्रास्ट्रक्चर, पेपर लीक, भ्रष्टाचार और जवाबदेही की कमी का उल्लेख किया. उन्होंने प्रदूषित हवा और पानी को भी आम नागरिकों की समस्याओं से जोड़ा. उनका कहना था कि यह केवल किसी एक सरकार या राजनीतिक दल से जुड़ा मुद्दा नहीं है, बल्कि आजादी के बाद से मध्यम वर्ग लंबे समय से ऐसी चुनौतियों का सामना करता आया है.
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निजी सेवाओं पर बढ़ती निर्भरता
पूनावाला ने शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में निजी संस्थानों पर बढ़ती निर्भरता का भी मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि बच्चों की पढ़ाई के लिए परिवारों को अक्सर निजी स्कूलों का रुख करना पड़ता है, जबकि बुजुर्ग माता-पिता के इलाज के लिए निजी अस्पतालों पर निर्भरता बढ़ गई है. उनके अनुसार जब नागरिक टैक्स और अन्य शुल्क लगातार चुका रहे हैं, तब बुनियादी सेवाओं की गुणवत्ता को लेकर जवाबदेही भी सुनिश्चित होनी चाहिए.
टैक्स में राहत की मांग
पूनावाला ने मध्यम वर्ग, खासकर वेतनभोगी लोगों के लिए टैक्स का बोझ कम करने की मांग की. उन्होंने इनकम टैक्स स्लैब बढ़ाने की बात भी कही. उनका तर्क था कि सैलरी पाने वाले वर्ग पर अपेक्षाकृत ज्यादा कर भार पड़ता है और उसे राहत की जरूरत है. उन्होंने सरकार से टैक्सदाताओं के पैसे के इस्तेमाल में अधिक पारदर्शिता और प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करने की अपील की.
इस्तीफे की घोषणा से एक दिन पहले बयान
पूनावाला ने बताया कि उन्होंने 30 जुलाई को बीजेपी के प्रवक्ता पद से इस्तीफा सौंप दिया था, जिसकी औपचारिक मंजूरी लंबित थी. उन्होंने अपने फैसले के पीछे व्यक्तिगत वित्तीय परिस्थितियों समेत कई कारणों का उल्लेख किया. इस्तीफे की घोषणा से ठीक पहले मध्यम वर्ग के मुद्दों पर उनका यह बयान राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है.