दिल्ली LG को SC का नोटिस, कोर्ट को है उनकी इन शक्तियों पर डाउट
Supreme Court On Delhi LG Power: दिल्ली में सरकार और LG के बीच अक्सर चलने वाली तनातनी के बीच अब एक मामले में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी सामने आई है. सुप्रीम कोर्ट राजभवन को नोटिस जारी करते हुए कहा है कि हमें आपके शक्तियों की वैधता पर शंका है.
Supreme Court On Delhi LG Powers: हमेशा दिल्ली सरकार के एंटी नजर आने वाले उपराज्यपाल वीके सक्सेना की शक्तियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सवाल खड़े किए हैं. दिल्ली की मेयर शेली ओबेरॉय की एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने राजभवन को नोटिस जारी किया है. दिल्ली नगर निगम अधिनियम, 1957 की धारा 487 पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और आर महादेवन की पीठ ने कहा है कि हमें आपकी शक्तियों और उसकी वैधता पर शंका है.
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को दिल्ली नगर निगम अधिनियम, 1957 की धारा 487 को लेकर लगाए गए याचिका पर सुनवाई की. इसमें कोर्ट ने उपराज्यपाल वीके सक्सेना द्वारा नगर निगम दिल्ली (MCD) की स्थायी समिति के रिक्त पद को भरने के लिए चुनाव आयोजित करने के निर्देशों पर सवाल उठाए है.
उपराज्यपाल के कार्यालय को नोटिस जारी
दिल्ली की मेयर शेली ओबेरॉय ने SC में याचिका लगाई थी. इसमें 27 सितंबर को हुए चुनाव को चुनौती दी गई थी. इन चुनाव में भाजपा के उम्मीदवार की जीत हुई थी. न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और आर महादेवन की पीठ ने उपराज्यपाल की शक्तियों की वैधता पर गंभीर संदेह जताया. पीठ ने कहा कि हमें आपकी शक्तियों की वैधता पर गंभीर शंकाएं हैं'.
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चुनाव याचिका पर बहस
उपराज्यपाल की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता संजय जैन ने दलील दी कि इस याचिका की कोई वैधता नहीं है. क्योंकि केवल चुनाव याचिका ही इस चुनाव को चुनौती दे सकती थी. हालांकि, न्यायमूर्ति नरसिम्हा ने कहा कि हमारी प्रारंभिक राय भी यही थी कि अनुच्छेद 32 के तहत याचिका क्यों? लेकिन इसे देखने के बाद हमें लगता है कि यह ऐसा मामला है जिसमें हमें नोटिस जारी करना होगा. खासकर धारा 487 के तहत शक्तियों के प्रयोग के तरीके को देखते हुए.
चुनाव कराने की जल्दबाजी पर सवाल
न्यायमूर्ति नरसिम्हा ने सवाल किया कि चुनाव कराने की इतनी जल्दबाजी क्यों है? उन्होंने कहा कि मेयर की भूमिका बैठक की अध्यक्षता करने की होती है. आपको धारा 487 के तहत यह सब रोकने की शक्ति कहां से मिलती है, जो कार्यकारी शक्ति है. यह विधायी कार्यों में हस्तक्षेप करने के लिए नहीं है. लोकतंत्र का क्या होगा यदि आप ऐसे हस्तक्षेप करते रहेंगे?
चुनाव टालने का अनुरोध
मेयर शेली ओबेरॉय की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता एएम सिंघवी ने पीठ से आग्रह किया कि स्थायी समिति के अध्यक्ष के चुनाव को फिलहाल रोकने का निर्देश दिया जाए. कोर्ट ने मौखिक रूप से जैन को तब तक चुनाव न कराने को कहा जब तक कि मामले की अगली सुनवाई न हो. न्यायालय दो सप्ताह बाद इस मामले को फिर से उठाएगा.
चुनाव की तारीख पर विवाद
जैन ने यह तर्क दिया कि मेयर ने चुनाव को 5 अक्टूबर तक टाल दिया है, जो सुप्रीम कोर्ट के 5 अगस्त के निर्देशों का उल्लंघन है, जिसमें रिक्ति को एक महीने के भीतर भरने का आदेश दिया गया था. यह सीट तब खाली हुई जब वार्ड नंबर 120 (द्वारका-बी) के पार्षद कमलजीत सहरावत ने लोकसभा चुनाव जीत लिया था.