सिद्धिविनायक मंदिर चढ़ावा चोरी पर सियासी घमासान, राज ठाकरे के दावों का संजय राउत ने किया समर्थन
सिद्धिविनायक मंदिर में चढ़ावे में कथित गड़बड़ी के आरोपों को लेकर महाराष्ट्र की राजनीति गरमा गई है. मनसे प्रमुख राज ठाकरे और संजय राउत ने निष्पक्ष जांच की मांग की है, जबकि मंदिर ट्रस्ट ने सभी आरोप खारिज किए हैं.
मुंबई के प्रसिद्ध सिद्धिविनायक मंदिर में चढ़ावे की राशि में कथित अनियमितताओं को लेकर महाराष्ट्र की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है. महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे के आरोपों का शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने समर्थन किया है. राउत ने दावा किया कि मंदिर के प्रबंधन में बदलाव के बाद कथित अनियमितताओं में वृद्धि हुई है. वहीं, राज ठाकरे ने आरोप लगाया कि मंदिर में हर वर्ष करीब 18 करोड़ रुपये के चढ़ावे का कथित रूप से दुरुपयोग हो रहा है.
पत्र सामने आने के बाद तेज हुई बहस
यह मामला तब चर्चा में आया जब मंदिर ट्रस्ट के आठ ट्रस्टियों की ओर से महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को लिखा गया एक पत्र सार्वजनिक हुआ. अप्रैल 2026 के इस पत्र में कहा गया कि कुछ कर्मचारियों की गिरफ्तारी के बाद मंदिर में प्राप्त होने वाले चढ़ावे में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई. ट्रस्टियों ने आशंका जताई कि पहले चढ़ावे की चोरी या कम रिकॉर्डिंग के कारण मंदिर को हर साल लगभग 18 करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता था. इसके बाद राज ठाकरे ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की.
मंदिर ट्रस्ट ने आरोपों को किया खारिज
सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि चढ़ावे में बढ़ोतरी का कारण बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था और निगरानी है, न कि किसी वित्तीय अनियमितता का खुलासा. ट्रस्ट के अनुसार, संदिग्ध गतिविधियों में शामिल कर्मचारियों के खिलाफ पहले ही कार्रवाई की जा चुकी है और व्यवस्था की कमियों को दूर कर दिया गया है. ट्रस्ट का कहना है कि वर्तमान प्रणाली पहले की तुलना में अधिक पारदर्शी और प्रभावी है.
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कर्मचारियों पर कार्रवाई का दिया हवाला
ट्रस्ट ने बताया कि मार्च 2026 में उसकी शिकायत पर आठ कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया था. उन पर आरती की थाली में चढ़ाई गई नकदी में कथित हेराफेरी करने का आरोप था. सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर कार्रवाई की. इसके अलावा इस वर्ष 19 अन्य कर्मचारियों पर भी कार्रवाई की गई, जिन पर फूल विक्रेताओं के साथ मिलकर श्रद्धालुओं से शीघ्र दर्शन कराने के बदले पैसे लेने के आरोप लगे थे. जांच में बैंक खातों और यूपीआई लेनदेन के प्रमाण मिलने का भी दावा किया गया.
निष्पक्ष जांच की मांग, सरकार पर नजर
इस विवाद के बीच कई राजनीतिक दलों ने पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की है. महाराष्ट्र सरकार के मंत्री छगन भुजबल ने भी निष्पक्ष जांच का समर्थन किया, जबकि कांग्रेस ने जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग उठाई. दूसरी ओर, मंदिर ट्रस्ट का कहना है कि चढ़ावे की राशि त्योहारों और श्रद्धालुओं की संख्या के अनुसार स्वाभाविक रूप से घटती-बढ़ती रहती है. अब इस मामले में सरकार और जांच एजेंसियों के अगले कदम पर सभी की नजरें टिकी हैं.