मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के बीच भारत ने अपनी सफल कूटनीति के दम पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से भारतीय जहाज सुरक्षित बाहर निकाल लिए. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ईरान के साथ सीधी बातचीत की सराहना की. उन्होंने कहा कि यह तरीका शिपिंग फिर से शुरू करने का सबसे प्रभावी साधन साबित हुआ है.
जयशंकर ने बताया कि ईरानी अधिकारियों से बातचीत अभी भी जारी है. उन्होंने कहा कि अगर इससे नतीजे मिल रहे हैं, तो मैं इसे जारी रखूंगा. उन्होंने बताया कि अभी कई भारतीय झंडे वाले जहाजों को इस स्ट्रेट से गुजरना बाकी है. हालांकि मीडिया से बातचीत के दौरान जयशंकर ने साफ कहा कि यह कोई सामान्य समझौता नहीं था.
विदेश मंत्री ने कहा कि यह लेन-देन नहीं है. भारत और ईरान के बीच पुराना रिश्ता है. हम इस संघर्ष को दुर्भाग्यपूर्ण मानते हैं. पिछले हफ्ते ईरान ने दो भारतीय झंडे वाले एलपीजी वाहक जहाजों को होर्मुज से गुजरने की इजाजत दी. यह अनुमति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के बीच फोन बातचीत के कुछ घंटों बाद मिली. यह युद्ध शुरू होने के बाद दोनों नेताओं की पहली बातचीत थी.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के तेल का पांचवां हिस्सा ले जाता है. ईरान-अमेरिका-इजरायल संघर्ष से यह प्रभावित हुआ. ईरान ने अमेरिकी और इजरायली जहाजों को निशाना बनाया. इससे कई देशों के जहाज फंस गए. ईरान के विदेश मंत्री अराघची ने कहा कि स्ट्रेट सभी के लिए खुला है, सिर्फ अमेरिका और इजरायल के जहाजों के लिए बंद है. भारत के लगभग 22 जहाज फंसे थे, जिसमें से अब तक चार सुरक्षित निकल चुके हैं. हालांकि तनाव अब भी जारी है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्ट्रेट की सुरक्षा के लिए युद्धपोत भेजे. उन्होंने सहयोगी देशों पर दबाव डाला कि वे मदद करें. ट्रंप ने कहा कि जो इस रास्ते से फायदा लेते हैं, उन्हें सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए. तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं. युद्ध तीसरे हफ्ते में है, इससे वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा गया है.
जयशंकर से जब पूछा गया कि क्या यूरोपीय देश भारत जैसी व्यवस्था अपना सकते हैं, तो उन्होंने कहा कि हर रिश्ता अपनी खूबियों पर टिका है. तुलना मुश्किल है. फिर भी, भारत यूरोपीय राजधानियों के साथ अपना नजरिया साझा करने को तैयार है. भारत ने सैन्य हस्तक्षेप के बजाय संवाद का रास्ता चुना. इसे कूटनीति की जीत बताई जा रही है.