'भारत अपनी नियति का स्वयं निर्माता है', गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र के नाम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का संबोधन
गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देश को संबोधित करते हुए स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि दी, संविधान के आदर्शों को याद किया और नागरिकों से एकजुट होकर आत्मनिर्भर भारत के निर्माण का आह्वान किया.
नई दिल्ली: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने संबोधन की शुरुआत उन वीर सपूतों को श्रद्धांजलि देकर की, जिन्होंने भारत को विदेशी शासन की बेड़ियों से मुक्त कराने के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया. उन्होंने कहा कि आजादी की यह विरासत देश की सबसे बड़ी शक्ति है और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी.
सशस्त्र बलों की तैयारी की सराहना
राष्ट्रपति ने देश की सुरक्षा में तैनात सशस्त्र बलों की सतर्कता और तैयारी की प्रशंसा की. उन्होंने कहा कि सीमाओं की रक्षा और नागरिकों की सुरक्षा के लिए हमारे सैनिक हर परिस्थिति में तत्पर रहते हैं. यह समर्पण भारत की संप्रभुता और अखंडता की मजबूत नींव है.
लोकतांत्रिक यात्रा और संवैधानिक मूल्य
अपने संबोधन में राष्ट्रपति मुर्मू ने भारत की लोकतांत्रिक यात्रा पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि 15 अगस्त 1947 को आजादी मिलने के बाद संविधान के पूर्ण रूप से लागू होने से भारत एक लोकतांत्रिक गणराज्य के रूप में स्थापित हुआ. संविधान ने देश को औपनिवेशिक व्यवस्था से मुक्त कर एक नई पहचान दी.
संविधान की आत्मा और गणराज्य की पहचान
राष्ट्रपति ने संविधान को विश्व के सबसे बड़े गणराज्य का आधार बताया. उन्होंने कहा कि न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व जैसे आदर्श भारत के गणराज्य को परिभाषित करते हैं. संविधान निर्माताओं ने इन मूल्यों के जरिए राष्ट्रीय एकता और राष्ट्रवाद की भावना को मजबूत आधार दिया.
आगे बढ़ते भारत का आह्वान
अंत में राष्ट्रपति ने नागरिकों से एकजुट होकर देश के उज्ज्वल भविष्य के लिए काम करने का आह्वान किया. उन्होंने समावेशिता, एकता और लचीलापन मजबूत करने पर जोर दिया ताकि भारत एक समृद्ध और आत्मनिर्भर राष्ट्र के रूप में आगे बढ़ सके.
राष्ट्रपति के संबोधन की बड़ी बातें
- स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता
- सशस्त्र बल देश की सुरक्षा की मजबूत ढाल हैं
- संविधान भारत की लोकतांत्रिक आत्मा है
- न्याय, समानता और स्वतंत्रता गणराज्य की पहचान हैं
- एकता और समावेशिता से ही विकसित भारत का सपना साकार होगा
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