नई दिल्ली: मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच चार दिनों तक चला सैन्य टकराव अब अंतरराष्ट्रीय सैन्य विश्लेषण का विषय बन गया है. स्विट्जरलैंड के एक प्रतिष्ठित रक्षा अध्ययन संस्थान की रिपोर्ट ने दावा किया है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायुसेना ने ऐसी रणनीतिक बढ़त बनाई, जिसने पाकिस्तान को युद्धविराम के लिए मजबूर कर दिया. यह रिपोर्ट बताती है कि भारत ने बिना परमाणु सीमा लांघे, सटीक और प्रभावी सैन्य दबाव बनाया.
स्विट्जरलैंड स्थित सेंटर द’हिस्त्वार ए द प्रोस्पेक्टिव मिलिटेयर (CHPM) की रिपोर्ट के अनुसार, 7 से 10 मई 2025 तक चले ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने स्पष्ट वायु श्रेष्ठता हासिल की. अध्ययन में कहा गया कि भारत ने अपने महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों की रक्षा की, दुश्मन की क्षमताओं को कमजोर किया और टकराव की गति को नियंत्रित किया. यह विश्लेषण किसी सरकार से जुड़ा नहीं है और इसे स्वतंत्र विशेषज्ञों ने तैयार किया है.
रिपोर्ट के मुताबिक, पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत की प्रतिक्रिया पहले से अलग थी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राजनीतिक स्तर पर यह फैसला लिया गया कि जैश ए मोहम्मद और लश्कर ए तैयबा के ठिकानों पर सीमा के भीतर गहरे हमले किए जाएं. सेना को हालात के अनुसार कार्रवाई की पूरी छूट दी गई. इसे भारत की बदली हुई सैन्य सोच के रूप में देखा गया.
8 और 9 मई को भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के एयर डिफेंस नेटवर्क को निशाना बनाया. रिपोर्ट के अनुसार, सीमा निगरानी रडार और लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणालियों पर हमले किए गए. चुनियन और पस्रूर में शुरुआती चेतावनी रडार निष्क्रिय हुए. इससे पाकिस्तान की हवाई निगरानी क्षमता काफी घट गई और उसके कई सिस्टम ने खुद को छिपा लिया.
10 मई की रात भारतीय वायुसेना ने ब्रह्मोस, स्कैल्प ईजी और रैम्पेज मिसाइलों से पाकिस्तान के कई एयरबेस पर हमला किया. नूर खान, मुरीद, रहीम यार खान, रफीकी, जैकोबाबाद और भोलारी एयरबेस प्रभावित हुए. रिपोर्ट का दावा है कि इन हमलों में लड़ाकू विमान, ड्रोन, रडार और कमांड सेंटर नष्ट हुए. इससे पाकिस्तान की जवाबी क्षमता बुरी तरह कमजोर हो गई.
रिपोर्ट के अनुसार, 10 मई की दोपहर तक पाकिस्तान ने सीजफायर की मांग की. भारत ने इसे स्वीकार किया क्योंकि उसके सैन्य और राजनीतिक लक्ष्य पूरे हो चुके थे. विश्लेषण में कहा गया कि भारत ने सीमित समय में निर्णायक दबाव बनाकर संघर्ष समाप्त किया. यह संदेश भी गया कि भारत अब लंबे युद्ध में उलझे बिना, तेज और प्रभावी कार्रवाई करने में सक्षम है.