झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ आदिवासी नेता शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्म भूषण सम्मान दिए जाने की घोषणा की गई है. यह सम्मान उन्हें जनकल्याण और सामाजिक न्याय के क्षेत्र में उनके अहम योगदान के लिए दिया जा रहा है. इस घोषणा के बाद झारखंड में खुशी की लहर दौड़ गई है और लोगों में गर्व का माहौल है.
गृह मंत्रालय (MHA) द्वारा जारी आधिकारिक सूची के अनुसार, पद्म पुरस्कारों का वितरण गणतंत्र दिवस 2026 के अवसर पर किया जाएगा. यह सम्मान उन लोगों को दिया जाता है, जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्र में देश और समाज के लिए उल्लेखनीय काम किया हो.
इस साल कुल 131 पद्म पुरस्कारों की घोषणा की गई है. इनमें 5 पद्म विभूषण, 13 पद्म भूषण और 113 पद्म श्री शामिल हैं. इसमें दो संयुक्त मामलों को एक पुरस्कार के रूप में गिना गया है. राष्ट्रपति ने इस पूरी सूची को मंजूरी दी है.
शिबू सोरेन को लोग प्यार से ‘गुरुजी’ कहकर बुलाते थे. उन्होंने अपना पूरा जीवन आदिवासी समाज के अधिकारों और सम्मान के लिए समर्पित कर दिया. वे लंबे समय तक आदिवासी आवाज के सबसे मजबूत नेता माने जाते रहे.
शिबू सोरेन ने झारखंड को अलग राज्य बनाने की लड़ाई में बड़ी भूमिका निभाई. आदिवासी समुदाय के हक, जल-जंगल-जमीन और सामाजिक न्याय के मुद्दों को उन्होंने मजबूती से उठाया. उनके नेतृत्व में झारखंड की राजनीति को एक नई दिशा मिली.
पद्म भूषण की घोषणा के बाद राजनीतिक, सामाजिक और आदिवासी संगठनों ने इस फैसले का स्वागत किया है. लोगों का कहना है कि यह सम्मान शिबू सोरेन के संघर्ष, त्याग और सेवा को सच्ची श्रद्धांजलि है.
राज्य के अलग-अलग हिस्सों में लोगों ने खुशी जताई है. समर्थकों और आदिवासी समाज का मानना है कि गुरुजी को मिला यह सम्मान आने वाली पीढ़ियों को सामाजिक न्याय और अधिकारों की लड़ाई के लिए प्रेरित करेगा.