मिडिल ईस्ट संकट के समय भारत ने श्रीलंका को मदद के तौर पर 38,000 टन पेट्रोलियम भेजा है. कोलंबो ने रविवार को इस सहायता के लिए भारत की सराहना की और आभार व्यक्त किया. भारतीय उच्चायोग के अनुसार, इसमें 20,000 टन डीजल और 18,000 टन पेट्रोल शामिल है. श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा ने प्रधानमंत्री मोदी से बातचीत का जिक्र किया.
इस मौके पर पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे के बड़े बेटे और सांसद नामल राजपक्षे ने कहा कि भारत ने एक बार फिर ‘नीबरहुड फर्स्ट’ नीति दिखाई. उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी और भारत के लोगों ने समय पर पेट्रोलियम भेजकर यह साबित किया.” राजपक्षे ने यह भी कहा कि भारत हमेशा संकट में श्रीलंका का पहला जवाब देने वाला रहा है.
Thank You India 🇮🇳 🙏
— Sri Lanka Tweet 🇱🇰 (@SriLankaTweet) March 29, 2026
Sri Lanka President Anura Kumara Dissanayake thanks India for its swift support after Sri Lanka faced fuel supply disruptions due to the Middle East conflict.
President @anuradisanayake says he spoke with India PM Narendra Modi days ago, and 38,000 MT of… pic.twitter.com/jrD4JRPHEb
वहीं विपक्षी नेता सजित प्रेमादासा ने भारत को धन्यवाद देते हुए ट्वीट किया, “यह आपात ईंधन सहायता हमें याद दिलाती है कि रिश्तों की परीक्षा संकट में होती है, सुख में नहीं. हमें उन्हें नहीं भूलना चाहिए जो हमारे साथ खड़े रहे जब इसकी सबसे ज्यादा जरूरत थी.” उनका बयान सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ.
भारतीय उच्चायोग के अनुसार, पश्चिम एशिया और सिंगापुर के आपूर्तिकर्ताओं ने ‘फोर्स मेज्योर’ लागू कर दी थी. जहाजों की अनुपलब्धता और संघर्ष से उपजी बाधाओं के कारण ईंधन की नियमित डिलीवरी रुक गई थी. यही वजह रही कि श्रीलंका को भारत से तत्काल मदद लेनी पड़ी. राष्ट्रपति अनुरा कुमारा ने प्रधानमंत्री मोदी से 24 मार्च को बात की थी.
नामल राजपक्षे ने श्रीलंका सरकार से अपील की कि वह भारत के हाल के ईंधन टैक्स मॉडल को अपनाए. उन्होंने कहा कि भारत ने एक्साइज ड्यूटी इसलिए कम की ताकि कीमतें तुरंत न घटें, बल्कि वैश्विक तेल संकट के दौरान बाजार स्थिर रहे. उन्होंने चेतावनी दी कि बिना सुधार के श्रीलंका भविष्य में भी ऐसे संकटों से जूझता रहेगा.