हुड्डा सरकार में जमकर हुआ क्षेत्रवाद, शेष राज्य के साथ हुआ सौतेला बर्ताव
हुड्डा सरकार इस कदर क्षेत्रवाद में लिप्त थी कि जब मॉडल गांव की बारी आई तो उसने 36% मॉडल गांव केवल दो ही जिलों को दे दिए. उनमें भी हुड्डा का गृह जिला रोहतक सबसे बड़ा लाभार्थी था. सिरसा, महेंद्रगढ़, पंचकुला जैसे जिलों को पूरी तरह से दरकिनार कर दिया गया.
Haryana News: लोकतंत्र में सरकार जनता के आदेश पर चुनकर आती है और जनता द्वारा चुनी हुई सरकार को जनता के हित में काम करना होता है. लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार के लिए सभी नागरिक समान होते हैं लेकिन हरियाणा में एक दौर ऐसा भी रहा है जब राज्य सरकार को कुछ ही इलाकों से मतलब था. बाकी क्षेत्रों की उस सरकार ने कभी भी चिंता नहीं की. सरकार ने अधिकतर क्षेत्र को अपने ही हाल पर छोड़ दिया था. मुख्यमंत्री के स्तर पर भी जनता के साथ सरेआम भेदभाव होता था. एक विशेष क्षेत्र और समुदाय को लाभ पहुंचाने के लिए कांग्रेस शासन ने सरकारी खजाना खोल दिया था.
वो दौर था हरियाणा के पूर्व सीएम और कांग्रेस नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा का दौर. हुड्डा के शासन में प्रदेश के सभी संसाधनों को व्यवस्थित तरीके से एक ही इलाके की ओर मोर दिया गया था. यह वो इलाका था जहां हुड्डा अपने राजनीतिक हित साथ सकते थे और प्रदेश के बाकी इलाके भगवान भरोसे थे. सरकार ने उन इलाकों पर ध्यान ही नहीं दिया.
हुड्डा के समय में सरकार को इस बात से मतलब ही नहीं था कि प्रदेश की अधिकतर आबादी मुंह ताक रही है, उसे केवल अपने पसंदीदा इलाके से मतलब था.
पसंदीदा इलाकों पर लुटा दी जनता की रकम
हुड्डा सरकार में प्रदेश की जनता के साथ भेदभाव का सबसे बड़ा उदाहरण गुरुग्राम में एक्सटर्नल डेवलपमेंट चार्जेज (EDC) के नाम पर वसूले गए 5,000 करोड़ रुपए में से 1,000 करोड़ रुपए से अधिक का कुप्रबंधन है. हुड्डा के शासन में यह रकम गुरुग्राम के लोगों से वसूली गई थी. सरकार ने कोर्ट के सामने यह कबूल किया था लेकिन इतनी बड़ी रकम को सरकार विकास के कार्यों पर खर्च ही नहीं कर सकी.
सरकार की प्राथमिकता में रहा रोहतक
हुड्डा सरकार इस कदर क्षेत्रवाद में लिप्त थी कि जब मॉडल गांव की बारी आई तो उसने 36% मॉडल गांव केवल दो ही जिलों को दे दिए. उनमें भी हुड्डा का गृह जिला रोहतक सबसे बड़ा लाभार्थी था. सिरसा, महेंद्रगढ़, पंचकुला जैसे जिलों को पूरी तरह से दरकिनार कर दिया गया.
राजनीतिक विरोधियों के साथ सौतेला बर्ताव
हुड्डा सरकार में राजनीतिक विरोधियों के साथ सौतेला बर्ताव किया गया. सिरसा को ही ले लीजिए. सिरसा से चौटाला परिवार का नाता है. सरकार की प्राथमिकताओं में यहां का विकास शामिल नहीं था.
जनता से वसूला पैसा, खर्च करने में किया भेदभाव
2004-05 से 2013-14 के बीच हरियाणा अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी (HUDA) की ओर से जो संसाधन जुटाए गए, उनके आवंटन में जमकर बंदरबांट हुई. चुन-चुनकर उन जिलों को दरकिनार किया गया जो कांग्रेस के इकोसिस्टम में फिट नहीं बैठते थे. इसका परिणाम यह हुआ कि रेवाड़ी, चरखी दादरी, भिवानी, महेंद्रगढ़, जींद, हिसार, फतेहाबाद, कैथल, सिरसा और यमुनानगर जिलों की प्रगति पर विराम लग गया.
खास क्षेत्र तक सीमित रह गईं सरकार की घोषणाएं
कांग्रेस के शासनकाल में जितनी भी घोषणाएं होती थीं, उनको केवल एक खास क्षेत्र तक ही सीमित रखा गया और शेष प्रदेश को उसी के हाल पर छोड़ दिया गया. कांग्रेस के इस दोगलेपन से हरियाणा में एक खास समाज और क्षेत्र का विकास तो हुआ लेकिन अधिकतर इलाके बदहाल रह गए. हुड्डा शासन में सरकार से किसी भी तरह की उम्मीद करना बेमानी हो चुका था.