Mamata Banerjee: बंगाल सरकार ने रामनवमी के दिन छुट्टी का किया ऐलान, BJP बोली- 'हिंदू विरोधी छवि भुनाने की कोशिश लेकिन नाकाम'

Lok Sabha Elections 2024: बंगाल की CM ममता बनर्जी ने राम नवमी के दिन सार्वजनिक छुट्टी का ऐलान किया है. बीजेपी ने ममता बनर्जी पर तंज कसते हुए कहा कि ममता बनर्जी ने यह कदम अपनी हिंदू विरोधी छवि को भुनाने के लिए उठाया है लेकिन अब काफी देर हो चुकी है.

India Daily Live

Lok Sabha Elections 2024: 2024 लोकसभा चुनाव से पहले बंगाल की CM ममता बनर्जी ने बड़ा दांव चला है. पश्चिम बंगाल सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए 17 अप्रैल को राम नवमी के दिन सार्वजनिक छुट्टी का ऐलान किया है. राज्य में पिछले साल सहित रामनवमी जुलूस के दौरान हिंसा देखी गई थी. जिसके बाद बीजेपी ने हिंसा की घटनाओं के लिए ममता बनर्जी की सरकार को जिम्मेदार ठहराया था. बीजेपी ने आरोप लगाया है कि राज्य सरकार हिंदू धार्मिक जुलूसों पर अंकुश लगाने का प्रयास कर रही है. 

राम नवमी के दिन छुट्टी का ऐलान ऐसे समय हुआ है जब टीएमसी कोलकाता के प्रतिष्ठित ब्रिगेड परेड ग्राउंड में रविवार को एक बड़ी रैली के साथ लोकसभा चुनाव अभियान की शुरुआत करने जा रही है. ममता सरकार के इस फैसले पर प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए BJP आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने कहा कि ममता बनर्जी ने अपनी हिंदू विरोधी छवि को भुनाने के लिए ममता ने यह कदम उठाया है लेकिन अब बहुत देर हो चुकी है. 

'हिंदू विरोधी छवि भुनाने के लिए उठाया गया कदम'

अमित मालवीय ने एक्स पोस्ट पर लिखा "CM ममता बनर्जी जो हर बार 'जय श्री राम' सुनते ही गुस्से से नीली हो जाती है. उन्होंने पश्चिम बंगाल में 17 अप्रैल को राम नवमी के दिन सार्वजनिक अवकाश का ऐलान किया है. ऐसा उन्होंने अपनी हिंदू विरोधी छवि को भुनाने के लिए किया है हालांकि बहुत देर हो चुकी है. इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि रामनवमी के जुलूस पर कोई पथराव न हो. जय श्री राम."

पिछले साल दलखोला में रामनवमी के जुलूस के दौरान भड़की थी हिंसा

पिछले साल 30 मार्च को पश्चिम बंगाल के उत्तर दिनाजपुर जिले के दलखोला में रामनवमी के जुलूस के दौरान हिंसा हुई थी. उत्तर दालखोला के तजामुल चौक पर हमले के बाद भड़की सांप्रदायिक हिंसा के मद्देनजर राज्य पुलिस ने शुरुआत में 162 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था. इसके बाद 27 अप्रैल को कलकत्ता उच्च न्यायालय ने रामनवमी समारोह के दौरान सांप्रदायिक हिंसा से संबंधित मामलों को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को ट्रांसफर करने का आदेश दिया था. उसके बाद एनआईए ने दालखोला और पांच अन्य मामलों की जांच की थी और आरोपियों को अपने गिरफ्त में लिया था.