राहुल गांधी की सुप्रीम कोर्ट में याचिका: SIR पर रोक से लेकर हटाए गए वोटरों की सूची सार्वजनिक करने तक, INDIA गठबंधन की 10 मांगें

राहुल गांधी और INDIA गठबंधन के 11 नेताओं ने सोमवार को SIR के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की. सुप्रीम कोर्ट याचिकाओं पर मंगलवार को सुनवाई करेगा.

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Sagar Bhardwaj

कांग्रेस नेता राहुल गांधी और विपक्षी INDIA गठबंधन के नेताओं ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के जरिए मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है. याचिका में चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कथित अनियमितताओं की जांच और पात्र मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा की मांग की गई है. सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 को करने की बात कही है.

CJI से मुलाकात नहीं हुई, फिर दाखिल की याचिका

राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और INDIA गठबंधन के समर्थकों ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट तक मार्च किया. विपक्षी नेताओं की योजना मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को ज्ञापन सौंपने की थी, लेकिन उनसे मुलाकात नहीं हो सकी. मुख्य न्यायाधीश ने नेताओं को अदालत में याचिका दाखिल करने का रास्ता अपनाने को कहा. इसके बाद औपचारिक याचिका दाखिल करने का फैसला किया गया.

राहुल गांधी शाम 4:30 बजे की समय-सीमा से पहले अदालत नहीं पहुंच सके. ऐसे में उनके वकील एस. प्रसन्ना ने याचिका दाखिल की. सुप्रीम कोर्ट ने रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि याचिका की प्रक्रिया उसी दिन पूरी की जाए और यदि कोई कमी हो, तो उसे दूर कराया जाए, ताकि मामले को मंगलवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जा सके.


याचिका में 11 नेताओं के नाम

124 पन्नों की याचिका में राहुल गांधी पहले याचिकाकर्ता हैं. उनके अलावा मल्लिकार्जुन खरगे, सौगत रॉय, अखिलेश यादव, तेजस्वी प्रसाद यादव, संजय राउत, एमए बेबी, डी. राजा, महुआ माझी, सुप्रिया सुले और ईटी मोहम्मद बशीर के नाम शामिल हैं. याचिका में भारत निर्वाचन आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को प्रतिवादी बनाया गया है.

याचिका की प्रमुख मांगें

1. SIR से जुड़े सभी रिकॉर्ड मांगे

याचिकाकर्ताओं ने निर्वाचन आयोग को SIR से संबंधित फाइलें, बैठक के रिकॉर्ड, कार्यवृत्त, आपत्तियां और अन्य दस्तावेज अदालत में पेश करने का निर्देश देने की मांग की है. इसमें 24 जून 2025 को SIR शुरू करने के फैसले से संबंधित ECINET और ERONET के एक्सेस लॉग तथा फाइल नोटिंग भी शामिल हैं.

2. SIR के फैसलों की वैधता की जांच

याचिका में मांग की गई है कि SIR से जुड़े फैसलों की संवैधानिक और कानूनी वैधता की जांच हो. इसमें संविधान के अनुच्छेद 324, मुख्य निर्वाचन आयुक्त एवं अन्य निर्वाचन आयुक्त अधिनियम, 2023 की धारा 18 और टी.एन. शेषन बनाम भारत संघ मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला दिया गया है. याचिकाकर्ताओं ने नियमों के विरुद्ध लिए गए फैसलों को रद्द करने की मांग भी की है.

3. जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई

याचिका में मतदाता सूची तैयार करने और उसमें संशोधन के दौरान संवैधानिक या कानूनी प्रावधानों के उल्लंघन के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है. इसमें जरूरत पड़ने पर जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 32 के तहत कार्रवाई का अनुरोध भी शामिल है.

4. शिकायतों पर उचित निर्णय

विपक्ष ने निर्वाचन आयोग को निर्देश देने की मांग की है कि वह याचिका और इससे संबंधित शिकायतों पर उचित फैसला करे. साथ ही, SIR से जुड़े फैसलों को निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत लेने और उनका रिकॉर्ड रखने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए.

5. ऑनलाइन फॉर्म-6 में नियमों का पालन

याचिका में कहा गया है कि ऑनलाइन फॉर्म-6, निर्वाचक पंजीकरण नियम, 1960 में निर्धारित प्रारूप के अनुरूप होना चाहिए. नियमों में विधिवत संशोधन किए बिना निर्धारित फॉर्म से अलग बदलाव नहीं किए जाने चाहिए.

6. स्वतंत्र समिति से ऑडिट कराने की मांग

याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में स्वतंत्र समिति बनाने की मांग की है. इसमें तकनीकी विशेषज्ञों और प्रतिष्ठित नागरिकों को शामिल करने का प्रस्ताव है. समिति SIR के दौरान नाम हटाने और संशोधन की प्रक्रिया, मतदाता डेटाबेस में बदलाव, ECINET और ERONET की कार्यप्रणाली तथा EVM के तकनीकी डिजाइन और इस्तेमाल की समीक्षा करे. इसमें स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों के लिए वैश्विक सर्वोत्तम प्रक्रियाओं पर भी विचार करने की मांग है.

7. हटाए गए नाम और कारण सार्वजनिक हों

याचिका में निर्वाचन आयोग से SIR के दौरान हटाए गए मतदाताओं के नाम बूथवार प्रकाशित करने को कहा गया है. साथ ही, हर नाम हटाने का कारण, मतदाताओं का आयु और लिंग के आधार पर वर्गीकरण तथा पात्र लोगों के नाम दोबारा शामिल कराने की प्रभावी व्यवस्था बनाने की मांग की गई है.

8. नोटिस और सुनवाई के बिना नाम न हटें

विपक्ष ने मांग की है कि किसी भी मतदाता का नाम हटाने से पहले कानून के अनुसार नोटिस दिया जाए और अपना पक्ष रखने का उचित अवसर मिले. पंजाब सहित उन राज्यों में, जहां चुनाव होने वाले हैं, पात्र नागरिकों को निर्धारित अंतिम तारीख तक नाम जुड़वाने के लिए आवेदन करने की अनुमति देने का भी अनुरोध किया गया है.

9. SIR प्रक्रिया पर अंतरिम रोक

याचिका में सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया गया है कि मामले के अंतिम फैसले तक सभी राज्यों में चल रही SIR प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगाई जाए. याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इससे पात्र मतदाताओं के अधिकारों और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता की रक्षा की जा सकेगी.

10. अन्य जरूरी आदेश देने की मांग

विपक्ष ने अदालत से मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए कोई अन्य उचित आदेश देने का भी अनुरोध किया है, ताकि चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता और पात्र नागरिकों के मतदान के अधिकार सुरक्षित रह सकें.

अब अदालत के फैसले पर नजर

इस याचिका में INDIA गठबंधन ने SIR की प्रक्रिया, मतदाता सूची से नाम हटाने के तरीके और निर्वाचन आयोग की जवाबदेही से जुड़े मुद्दे उठाए हैं. मंगलवार को होने वाली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट इन मांगों पर विचार करेगा. याचिका में लगाए गए आरोप और मांगे अभी याचिकाकर्ताओं के पक्ष हैं; अदालत का अंतिम फैसला आना बाकी है.