नई दिल्ली: कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि भारत में लोगों को अपनी बात रखने से रोका जा रहा है. इसी दौरान उन्होंने आरएसएस को लेकर भी बयान दिया और कहा कि जरूरत पड़ने पर उसकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा करेंगे.
राहुल गांधी ने कहा कि देश अपनी बात कहने से पीछे नहीं हटेगा. उनके मुताबिक, डर के माहौल में कई लोग खुलकर बोलने से बच रहे हैं. उन्होंने कहा कि भारत को केवल अपने हजारों साल पुराने इतिहास के नजरिए से नहीं, बल्कि वर्तमान परिस्थितियों को समझकर देखना चाहिए. राहुल ने दावा किया कि सरकार लोगों की आवाज सीमित करने वाली व्यवस्था बना रही है. उन्होंने इसके उलट हर व्यक्ति को अपनी बात रखने का अधिकार देने की बात कही.
अपने संबोधन में राहुल गांधी ने आरएसएस को लेकर भी टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि अगर किसी दिन आरएसएस की अभिव्यक्ति को देश से बाहर करने की कोशिश होती है, तो वह उसकी भी रक्षा करेंगे. उनका तर्क था कि किसी संगठन या व्यक्ति की विचारधारा से असहमति अलग बात है, लेकिन उसकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता छीनना सही नहीं है. राहुल ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी की आवाज रोकना नहीं, बल्कि सभी को अपनी बात रखने का अवसर देना है.
राहुल गांधी ने जंतर-मंतर पर छात्रों और अन्य लोगों के प्रदर्शन का उदाहरण देते हुए कहा कि लोग अपनी परेशानियां सामने रखना चाहते हैं. उन्होंने एक महिला का भी उल्लेख किया, जो अपनी बेटी से जुड़े पुराने अपराध के मामले में अपनी बात रखना चाहती थी. राहुल के अनुसार, व्यवस्था के नाम पर लोगों को बोलने से रोकना सही नहीं है. उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसी व्यवस्था से कुछ खास लोगों को फायदा पहुंचता है और कांग्रेस इसका विरोध करती है.
राहुल गांधी की यह टिप्पणी दिल्ली में आयोजित कांग्रेस के ‘रचनात्मक कांग्रेस प्रकोष्ठ’ के अधिवेशन के दौरान आई. दो दिवसीय कार्यक्रम की शुरुआत 12 अगस्त को इंदिरा भवन में हुई. इसमें सामाजिक संगठनों, शिक्षाविदों, कलाकारों, नागरिक समाज और विभिन्न समुदायों से जुड़े प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया. पहले दिन रोजगार, अर्थव्यवस्था, गरीबी, असमानता, पर्यावरण, शिक्षा, स्वास्थ्य, न्याय, अधिकार, संस्कृति और शोध जैसे विषयों पर चर्चा हुई. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे भी कार्यक्रम में मौजूद रहे.