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राघव चड्ढा ने छोड़ा AAP का साथ, बीजेपी में शामिल होने का किया ऐलान

राघव चड्ढा ने दो अन्य AAP राज्यसभा सांसदों के साथ बीजेपी में शामिल होने का ऐलान कर दिया है.

Ashutosh Rai
Edited By: Ashutosh Rai
राघव चड्ढा ने छोड़ा AAP का साथ, बीजेपी में शामिल होने का किया ऐलान
Courtesy: Social Media

राघव चड्ढा ने दो अन्य AAP राज्यसभा सांसदों के साथ बीजेपी में शामिल होने का ऐलान कर दिया है. उन्होंने कहा कि मेरी अपनी पार्टी ने मुझे चुप करा दिया. राज्यसभा में उप-नेता के पद से हटाए जाने को लेकर आम आदमी पार्टी के साथ सार्वजनिक विवाद के कुछ दिनों बाद, सांसद राघव चड्ढा ने शुक्रवार को घोषणा की कि वह अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली पार्टी छोड़ देंगे और बीजेपी में शामिल होने जा रहे हैं. वहीं संदीप पाठक और अशोक मित्तल ने भी AAP छोड़ने की घोषणा की और बीजेपी में शामिल होंगे.

प्रेस कॉन्फ्रेंस में कही ये बात

संदीप पाठक और अशोक मित्तल के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए राघव चड्ढा ने कहा, "हमने फैसला किया है कि हम, राज्यसभा में AAP के 2/3 सदस्य, भारत के संविधान के प्रावधानों का इस्तेमाल करते हुए खुद को बीजेपी में मिला लेंगे."

AAP के 2/3 सांसदों ने किए हस्ताक्षर

AAP सांसद राघव चड्ढा ने कहा कि, "राज्यसभा में AAP के 10 सांसद हैं, उनमें से 2/3 से ज्यादा हमारे साथ हैं. उन्होंने हस्ताक्षर किए हैं और आज सुबह हमने हस्ताक्षरित पत्र और दस्तावेज राज्यसभा के सभापति को सौंप दिए. उनमें से 3 आपके सामने यहां मौजूद हैं. हमारे अलावा, हरभजन सिंह, राजिंदर गुप्ता, विक्रम साहनी और स्वाति मालीवाल भी हैं."

सिद्धांतों, मूल्यों और नैतिक आदर्शों से भटक गई पार्टी

अपने फैसले की वजह बताते हुए चड्ढा ने कहा कि जिस पार्टी को उन्होंने "अपने खून-पसीने से सींचा था," वह अपने मूल सिद्धांतों से भटक गई है. "AAP, जिसे मैंने अपने खून-पसीने से सींचा और अपनी जवानी के 15 साल दिए, वह अपने सिद्धांतों, मूल्यों और नैतिक आदर्शों से भटक गई है. अब यह पार्टी देश के हित में काम नहीं करती, बल्कि अपने निजी फ़ायदे के लिए काम करती है. पिछले कुछ सालों से, मुझे यह महसूस हो रहा था कि मैं एक गलत पार्टी में सही इंसान हूं. इसलिए, आज हम घोषणा करते हैं कि मैं AAP से खुद को अलग कर रहा हूँ और जनता के करीब जा रहा हूं."

यह घोषणा AAP के भीतर बढ़ते तनाव के बीच हुई, जो चड्ढा को एक अहम संसदीय पद से हटाए जाने के बाद शुरू हुआ था. यह हाल के सालों में AAP के नेतृत्व में आई सबसे बड़ी अंदरूनी दरारों में से एक मानी जा रही हैं.