PM मोदी की अध्यक्षता में महाबैठक शुरू! पहली बार नीति आयोग पहुंचे नए मुख्यमंत्री; जानें क्या रहा खास
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में नीति आयोग की 11वीं गवर्निंग काउंसिल बैठक शुरू हुई. बैठक में कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल के नए मुख्यमंत्री पहली बार बैठक में शामिल हुए.
नई दिल्ली: नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में नीति आयोग की 11वीं गवर्निंग काउंसिल की बैठक शुरू हो गई है. देश की राजधानी में आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्री, उपराज्यपाल, केंद्रीय मंत्री और नीति आयोग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए हैं. बैठक का मुख्य उद्देश्य वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में व्यापक रणनीति तैयार करना है.
इस बार बैठक की थीम विकसित भारत @2047 के लिए समावेशी मानव विकास रखी गई है. केंद्र सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि विकास का लाभ समाज के हर वर्ग, क्षेत्र और आयु समूह तक पहुंचे. बैठक में मानव विकास, रोजगार सृजन, कौशल विकास, स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार, पोषण, डिजिटल गवर्नेंस और सामाजिक समानता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की जा रही है.
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बैठक में किन बातों पर दिया जा रहा जोर?
बैठक में राज्यों और केंद्र के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर भी जोर दिया जा रहा है. नीति आयोग का मानना है कि विकसित भारत का लक्ष्य तभी हासिल किया जा सकता है जब सभी राज्य अपने विकास विजन को राष्ट्रीय विकास एजेंडे के साथ जोड़कर आगे बढ़ें. इसी दिशा में विभिन्न राज्यों से सुझाव और अनुभव भी साझा किए जा रहे हैं.
इस बैठक की क्या है खास बात?
इस बैठक की एक खास बात यह है कि कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय पहली बार नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की बैठक में शामिल हुए हैं. इनके अलावा केरल के मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशनभी पहली बार इस मंच का हिस्सा बने हैं.
राजनीतिक हलकों में इन नए मुख्यमंत्रियों की मौजूदगी को विशेष महत्व दिया जा रहा है. मुख्यमंत्री बनने के बाद डी.के. शिवकुमार ने केंद्र सरकार के साथ सहकारी संघवाद की भावना से काम करने की बात कही थी. उनके इस रुख को राज्य और केंद्र के संबंधों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
और किन बातों पर किया जा रहा विचार?
बैठक में दिसंबर 2025 में आयोजित मुख्य सचिवों के राष्ट्रीय सम्मेलन की सिफारिशों पर भी विचार किया जा रहा है. इन सिफारिशों का उद्देश्य शासन व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना और विकास परियोजनाओं को तेजी से लागू करना है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन सुझावों को प्रभावी रूप से लागू किया गया तो देश के विकास की गति को और बढ़ावा मिल सकता है.