नई दिल्ली: पीएम मोदी द्वारा देशवासियों से ईंधन बचाने की अपील किए जाने के बाद अब मोदी सरकार ईंधन बचाने के लिए बड़ी तैयारी को मूर्तरूप देने में जुट गई है. पीएम मोदी ने पेट्रोल-डीजल की खपत करने के लिए लोगों से वर्क फ्रॉम होम अपनाने की अपील भी की है, जिसके बाद अब सरकार इस दिशा में मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के लिए भी नए नियम लागू करने पर विचार कर रही है. सरकार इस तरह के नियम पहले जनप्रतिनधियों और अधिकारियों पर लागू करना चाहती है, जिससे एक सकारात्मक सन्देश लोगों के बीच जा सके.
पीएम मोदी की अपील के अनुसार वर्चुअल मीटिंग्स, पब्लिक ट्रांसपोर्ट और रिमोट वर्क जैसी व्यवस्थाओं को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मंत्रियों और अफसरों से कहा गया है कि वे तेल की खपत कम करने के लिए अपनी कार्ययोजना तैयार करें. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक गैर-जरूरी घरेलू और विदेश यात्राओं को सीमित करने या फिलहाल रोकने की भी सलाह दी गई है. इसके अलावा सेमिनार और कॉन्फ्रेंस को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संबोधित करने के भी निर्देश दिए गए हैं.
पीएम मोदी की अपील का सबसे अधिक असर राजधानी दिल्ली में देखने को मिल रहा है, जहां के कर्तव्य भवन कॉम्पलेक्स में कार्यरत अधिकारियों को मेट्रो और अन्य सार्वजनिक परिवहन के उपयोग के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक कई सरकारी विभाग वर्क फ्रॉम होम और हाइब्रिड मॉडल अपनाने की तैयारी में हैं, जिससे ऑफिस आने-जाने में होने वाले ईंधन खर्च को कम किया जा सके.
भव्य सरकारी आयोजनों में भी ईंधन की जबरदस्त खपत होती है, इससे निपटने के लिए सरकार अब इस तरह के आयोजनों में कटौती करने की प्लानिंग कर रही है. आयोजनों में कटौती का उद्देश्य बड़े स्तर पर होने वाले खाना पकाने और गैस खपत को कम करना है. सूत्र इस बात की भी तस्दीक कर रहे हैं कि कंपनियों में रिमोट वर्क, कार पूलिंग और निजी वाहनों के कम इस्तेमाल जैसे विकल्पों पर भी चर्चा चल रही है. यहां तक कि बड़े आयोजनों और शादियों के लिए भी कुछ सीमाएं तय करने पर भी विचार किया जा रहा है. हालांकि आधिकारिक तौर इसकी अभी कोई जानकारी नहीं दी गई है.
पीएम मोदी की अपील और सरकार की व्यापक तैयारी से कुछ लोग भविष्य को लेकर चिंतित नजर आ रहे हैं, जिसपर सरकार का स्पष्ट कहना है कि मौजूदा स्थिति आर्थिक संकट नहीं, बल्कि ईंधन प्रबंधन से जुड़ी चुनौती है. पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने लोगों को आश्वस्त किया कि देश में तेल और गैस का पर्याप्त भंडार है और लोगों को किसी तरह की कोई परेशानी नहीं आएगी. हालांकि सरकार यह आकलन कर रही है कि वैश्विक ऊर्जा संकट लंबा खिंचने की स्थिति में भारत कितने समय तक और किस तरह से इसका सामना कर सकता है.