पीएम मोदी ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से फोन पर की बात, इजरायल-ईरान युद्ध पर क्या हुई चर्चा?
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया पर जानकारी देते हुए बताया कि इस बातचीत में दोनों देशों की साझा चिंताओं पर चर्चा हुई. उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में संवाद और कूटनीति के जरिए ही समाधान निकाला जा सकता है.
पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से फोन पर बातचीत की. दोनों नेताओं ने क्षेत्र में तेजी से बदल रही स्थिति पर चिंता व्यक्त की और जल्द से जल्द शांति बहाल करने की जरूरत पर जोर दिया.
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया पर जानकारी देते हुए बताया कि इस बातचीत में दोनों देशों की साझा चिंताओं पर चर्चा हुई. उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में संवाद और कूटनीति के जरिए ही समाधान निकाला जा सकता है.
शांति और स्थिरता के लिए सहयोग पर सहमति
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और फ्रांस इस मुद्दे पर आपस में संपर्क बनाए रखेंगे और क्षेत्र में शांति और स्थिरता बहाल करने के लिए मिलकर प्रयास करेंगे. विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर दुनिया के कई हिस्सों पर पड़ सकता है, इसलिए बड़े देशों के बीच लगातार बातचीत जरूरी है.
कई देशों के नेताओं से कर चुके हैं बात
मौजूदा संकट शुरू होने के बाद प्रधानमंत्री मोदी पश्चिम एशिया के कई देशों के नेताओं से भी बातचीत कर चुके हैं. बताया जा रहा है कि अब तक उन्होंने क्षेत्र के लगभग आठ नेताओं से संपर्क कर स्थिति पर चर्चा की है. भारत का रुख साफ है कि किसी भी संघर्ष का समाधान युद्ध नहीं बल्कि बातचीत के जरिए ही निकाला जाना चाहिए.
संघर्ष के बीच बढ़ता जा रहा है तनाव
पश्चिम एशिया में हालात तब बिगड़े जब 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान पर सैन्य हमले किए. इस हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई थी. इसके बाद ईरान ने कई खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी और इजरायली सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए जवाबी हमले किए. इन हमलों से पूरे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है.
श्रीलंका के पास ईरानी जहाज डूबने से चिंता
इस संघर्ष के बीच हाल ही में एक और घटना सामने आई जब अमेरिका ने श्रीलंका के तट के पास ईरान के एक नौसैनिक जहाज को निशाना बनाया. बताया गया कि इस जहाज पर करीब 180 लोग सवार थे. इस हमले में कई लोगों की मौत हो गई, जबकि कुछ लोगों को श्रीलंकाई अधिकारियों ने बचा लिया. इस घटना के बाद ईरान ने अमेरिका की कार्रवाई की कड़ी निंदा की है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह संघर्ष लंबा चलता है तो इसका असर वैश्विक सुरक्षा, व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ सकता है.