पीएम मोदी को मिला इजरायली संसद का सर्वोच्च सम्मान, नेतन्याहू बोले- 'नरेंद्र आप मेरे दोस्त नहीं, भाई हैं'
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इजरायल की संसद का सर्वोच्च सम्मान 'स्पीकर ऑफ द नेसेट मेडल' पाने वाले पहले भारतीय पीएम बन गए हैं. यह सम्मान उनके नेतृत्व में भारत-इजरायल के बीच बढ़ते रणनीतिक, व्यापारिक और भावनात्मक रिश्तों की मजबूती का प्रतीक है.
नई दिल्ली: भारतीय कूटनीति के इतिहास में बुधवार का दिन एक मील का पत्थर साबित हुआ, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इजरायली संसद 'नेसेट' के सर्वोच्च सम्मान ‘स्पीकर ऑफ द नेसेट मेडल’ से सम्मानित किया गया. इजरायल के विधायी इतिहास में यह पहली बार है जब किसी भारतीय प्रधानमंत्री को इस गौरवशाली पदक से नवाजा गया है. नेसेट के स्पीकर अमीर ओहाना ने पीएम मोदी के संबोधन के बाद उन्हें यह पदक भेंट किया.
यह पदक प्रधानमंत्री मोदी के उस असाधारण योगदान और व्यक्तिगत नेतृत्व को मान्यता देता है, जिसके माध्यम से भारत और इजरायल के बीच रणनीतिक संबंधों ने एक नई ऊंचाई छुई है. पदक प्रदान करते समय इस बात पर जोर दिया गया कि पीएम मोदी के विजन ने दोनों देशों के बीच सहयोग के नए द्वार खोले हैं. यह केवल एक कूटनीतिक औपचारिकता नहीं, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती साख और इजरायल के साथ उसके गहरे भरोसे का परिणाम है.
इजरायल और फिलिस्तीन: संतुलन की बेमिसाल कूटनीति
पीएम मोदी दुनिया के उन गिने-चुने नेताओं में शामिल हो गए हैं, जिन्हें इजरायल और फिलिस्तीन दोनों ने अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मानों से नवाजा है. गौरतलब है कि साल 2018 में मोदी को 'ग्रैंड कॉलर ऑफ द स्टेट ऑफ फिलिस्तीन' से सम्मानित किया गया था, जो विदेशी गणमान्य व्यक्तियों को दिया जाने वाला फिलिस्तीन का सर्वोच्च पुरस्कार है. यह उपलब्धि पीएम मोदी की उस संतुलित और प्रभावी विदेश नीति को दर्शाती है, जो परस्पर विरोधी हितों वाले देशों के साथ भी सम्मानजनक संबंध बनाए रखने में सक्षम है.
'दोस्ती से बढ़कर भाईचारा': नेतन्याहू का भावुक संबोधन
नेसेट में पीएम मोदी के संबोधन से पहले इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया. नेतन्याहू ने मोदी को इजरायल का एक महान मित्र, भारत-इजरायल गठबंधन का चैंपियन और विश्व मंच का महान नेता बताया. उन्होंने मोदी को अपना 'प्रिय मित्र' और 'भाई' कहते हुए पुरानी यादें साझा कीं.
नेतन्याहू ने भावुक होकर कहा- 'नरेंद्र, मेरे प्रिय मित्र, आज आपकी यहां मौजूदगी ने मुझे गहराई तक झकझोर दिया है. पिछली बार जब आप यहां आए थे, तब हम भूमध्य सागर के तट पर थे और हमने पानी में उतरने के लिए अपने जूते उतार दिए थे. हमने पानी पर पैदल चलने का चमत्कार तो नहीं किया, लेकिन उसके बाद से हमने व्यापार को दोगुना, सहयोग को तिगुना और अपनी समझ को चौगुना करके असली चमत्कार जरूर कर दिखाया है.'