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CAA की चर्चा के बीच पीएम मोदी के असम दौरे के क्या हैं सियासी मायने?

नागरिकता संशोधन कानून यानी CAA को लेकर एक बार फिर देश में बयानबाजी शुरू हो गई है. केंद्रीय मंत्री के बयान के बाद विपक्ष की भी प्रतिक्रियाएं आने लगी हैं. कहा जा रहा है कि लोकसभा चुनाव की तारीखों के ऐलान से पहले देशभर में सिटिजनशिप अमेंडमेंट एक्ट लागू किया जा सकता है.

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Om Pratap
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PM Modi Assam visit amid CAA discussion: देश में लोकसभा चुनाव से पहले CAA यानी नागरिक संशोधन अधिनियम को लागू करने की चर्चा के बीच पीएम मोदी दो दिवसीय दौरे पर शनिवार शाम को असम पहुंचे. असम पहुंचने के बाद पीएम मोदी का भव्य स्वागत किया गया. लाखों दीये जलाए गए. सड़क के दोनों ओर खड़े लोगों ने उनके समर्थन में नारेबाजी की. यानी पूरा चुनावी माहौल.

पीएम मोदी आज यानी रविवार को असम के लोगों को 11 हजार 599 करोड़ रुपये की परियोजनाओं की सौगात देंगे. पीएम मोदी के असम दौरे के दौरान उनका भव्य स्वागत और प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन और शिलान्यास की बात तो समझ आती है, लेकिन CAA की चर्चा के बीच पीएम मोदी के असम दौरे के आखिर सियासी मायने क्या है? आइए, इसे समझते हैं.

दक्षिण के बाद उत्तर-पूर्व राज्य के दौरे पर पीएम मोदी

अयोध्या में रामलला के भव्य मंदिर के उद्घाटन और प्राण प्रतिष्ठा से पहले पीएम मोदी ने ताबड़तोड़ दक्षिण भारत के राज्यों का दौरा किया था. कहा गया था कि राम मंदिर के जरिए पीएम मोदी दक्षिण के राज्यों में भाजपा की पकड़ को मजबूत बनाना चाहते हैं. लेकिन अब पीएम मोदी उत्तर-पूर्व राज्य असम के दौरे पर पहुंचे हैं.

दरअसल, 11 दिसंबर 2019 को जब संसद से CAA यानी नागरिक संशोधन अधिनियम को पास किया गया, तब सबसे पहले असम में ही इस एक्ट के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुआ. इसके बाद 2019 के आखिरी महीने में CAA विरोध की आंच दिल्ली तक पहुंच गई थी और सैंकड़ों की संख्या में लोग शाहीनबाग में विरोध प्रदर्शन में जुट गए थे. 

आखिर अचानक क्यों हो रही है CAA की चर्चा?

दरअसल, पिछले हफ्ते सोमवार यानी 29 जनवरी को मोदी सरकार के मंत्री शांतनु ठाकुर ने बड़ा दावा करते हुए कहा था कि एक हफ्ते के अंदर CAA यानी नागरिक संशोधन अधिनियम को लागू कर दिया जाएगा. इसके बाद अचानक CAA एक बार फिर चर्चा में आ गया. हालांकि ये पहली बार नहीं है, जब भाजपा की ओर से इसे पूरे देश में लागू करने की बात कही गई हो. इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि यह देश का कानून है और इसे हर हाल में लागू किया जाएगा.

आगे बढ़ने से पहले एक लाइन में समझ लीजिए कि CAA कानून में अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से भारत में शरण लेकर रह रहे गैर मुस्लिम प्रवासी (हिंदू, ईसाई, सिख, जैन, बौद्ध और पारसी) को यहां की नागरिकता देने का प्रावधान है. CAA का विरोध करने वाले लोगों का तर्क है कि ये प्रावधान भेदभाव से भरा हुआ है, क्योंकि बाहर से आने वाले मुस्लिम शर्णार्थियों को इसमें शामिल नहीं किया गया है. 

असम समेत उत्तर-पूर्व राज्य में हुआ था विरोध

राजनीतिक जानकारों की मानें तो CAA कानून बनने के बाद से इसका सबसे ज्यादा विरोध असम समेत मेघालय, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, नगालैंड और अरुणाचल प्रदेश में किया गया था. इसका एक कारण ये हो सकता है कि ये राज्य बाग्लादेश के करीब हैं, जहां से अवैध रूप से घुसपैठिए असम में प्रवेश करते रहे हैं.

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन उत्तर-पूर्वी राज्यों में इस कानून का विरोध करने वाले लोगों ने कहा कि बांग्लादेश से मुस्लिम और हिंदू दोनों समुदाय के लोग अवैध रूप से यहां आते हैं, जिसके बाद हमारे हक की चीजों पर वो अपना अधिकार जमा लेते हैं. 

अब समझिए कि पीएम मोदी के असम दौरे के सियासी मायने क्या हैं?

ऊपर हमने जिक्र किया कि अयोध्या में रामलला की मंदिर के भव्य उद्घाटन और प्राण प्रतिष्ठा से पहले पीएम मोदी ने दक्षिण भारत के राज्यों का दौरा किया था. दरअसल, जब से केंद्र में नरेंद्र मोदी की सरकार आई है, कई मुद्दों पर भाजपा हिंदुत्व वाली राजनीति को धार देने में जुटी है. फिर बात राम मंदिर की हो, अनुच्छेद 370 हटाने की हो, सीएए-एनआरसी की हो या फिर काशी-मथुरा की झांकी बाकी वाली बात हो. कहा ये जा रहा है कि भाजपा को इसका फायदा मिलता भी दिख रहा है.

शायद इसलिए भाजपा ने अगले कुछ महीने में होने वाले आम चुनाव से पहले ही हिंदुत्व वाला एजेंडा सेट कर दिया है. शायद, सीएए यानी नागरिकता संशोधन कानून भी इसी एजेंडा को हिस्सा हो. शायद हिंदुत्व वाले एजेंडे का ही ये भी हिस्सा है कि पीएम मोदी आज जब असम दौरे पर हैं, तो वे यहां जिन प्रमुख परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे, उनमें 498 करोड़ रुपये की लागत वाली मां कामाख्या कॉरिडोर भी शामिल है. 

CAA के समर्थन में दिसंबर 2019 में पीएम मोदी ने लॉन्च किया था कैंपेन

लोकसभा के बाद राज्यसभा से CAA के पारित होने के बाद देशभर में इसे लेकर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए थे. तब इसके समर्थन में पीएम मोदी ने सोशल मीडिया कैंपेन लॉन्च किया था. पीएम मोदी ने तब ट्विटर (अब एक्स) पर इस कानून के बारे में जानकारी दी थी. पीएम मोदी ने कहा था कि ये शरणार्थियों को नागरिकता देने का कानून है और इससे किसी की नागरिकता नहीं छीनी जाएगी. 

क्या है CAA, क्यों हो रहा विरोध... सब कुछ आसान भाषा में समझिए

नागरिकता संशोधन अधिनियम यानी CAA को आसान भाषा में समझें तो इसमें भारत के बाहर से आने वाला गैरमुस्लिम समुदाय के लोगों के लिए यहां की नागरिकता देने के नियमों को आसान बनाया गया है. पहले ये नियम था कि कोई भारत का बाहर का है और पिछले 11 साल से यहां रह रहा है तो उसे भारत की नागरिकता दी जाएगी, लेकिन अब गरिकता संशोधन अधिनियम 2019 के तहत प्रावधान किया गया कि 11 साल की अवधि को कम कर 1 से 6 साल कर दिया गया. 

विदेश अधिनियम 1946 और पासपोर्ट एक्ट 1920 में भी किया संशोधन

ये भी समझ लीजिए कि  केंद्र सरकार की ओर से साल 2015 और 2016 में विदेशी अधिनियम, 1946 और  पासपोर्ट (भारत में प्रवेश) अधिनियम 1920 के कानून में संशोधन किया गया था. इन दोनों पुराने एक्ट में प्रावधान था कि अगर कोई बिना वैध दस्तावेज के भारत में घुसता हैं या फिर तय समय के बाद भी यहां रहने लगता है, तो ऐसे लोगों को अवैध प्रवासी माना जाएगा और उन्हें पकड़कर उनके देश भेज दिया जाएगा. लेकिन विदेशी अधिनियम, 1946 और पासपोर्ट (भारत में प्रवेश) अधिनियम, 1920 में संशोधन कर पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और क्रिस्चन को छूट दे दी गई.

2019 में लोकसभा और राज्यसभा से हुआ था पास, बन चुका है कानून

इन छह धर्म के लोगों को भारत का नागरिक बनाने और नागरिकता कानून 1955 में संशोधन के लिए 2016 में संसद में नागरिक संसोधन विधेयकयानी CAA पेश किया गया. अगस्त 2016 में इसे संयुक्त संसदीय कमेटी के पास भेजा गया, जिसकी रिपोर्ट जनवरी 2019 को सौंप दी गई. जनवरी में ही इसे लोकसभा में पास कर दिया गया और फिर 11 महीने के इंतजार के बाद इसे राज्यसभा से भी पास करा लिया गया. 12 दिसंबर 2019 को राष्ट्रपति की ओर से इसे मंजूरी मिली और ये कानून बन गया. हालांकि फिलहाल इसे देश में लागू नहीं किया गया है. 

 

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First Published : 04 February 2024, 12:29 PM IST