फलोदी सट्टा बाजार ने कर दी बंगाल चुनाव के नतीजों की भविष्यवाणी, इस पार्टी को दिया पूर्ण बहुमत
एग्जिट पोल के बाद सट्टा बाजारों ने 2026 विधानसभा चुनाव को लेकर अपने अनुमान बदले हैं. पश्चिम बंगाल में मुकाबला कड़ा दिख रहा है, जबकि अन्य राज्यों में रुझान पहले जैसे ही बने हुए हैं.
नई दिल्ली: विधानसभा चुनावों के नतीजों के ऐलान से पहले देश भर में जहां राजनीतिक सरगर्मियां चरम पर है, वही देश के अलग-अलग सट्टा बाजारों में भी विधानसभा चुनावों के नतीजों को लेकर खासी हलचल देखने को मिल रही है. एग्जिट पोल आने के बाद से सट्टा बाजारों में ये हलचल और अधिक बढ़ गई है. राजस्थान के फलोदी से लेकर दिल्ली और मुंबई तक सक्रिय इन बाजारों ने अपने अनुमान फिर से तय किए हैं. खासतौर पर पश्चिम बंगाल को लेकर तस्वीर बदलती नजर आ रही है. पहले जहां तृणमूल कांग्रेस को बढ़त मिलती दिख रही थी, अब भाजपा को बढ़त मिलती दिखाई जा रही है.
पश्चिम बंगाल में बदली तस्वीर
फलोदी सट्टा बाजार के ताजा अनुमान में पश्चिम बंगाल की 294 सीटों में भाजपा को 150 से 152 सीटें मिलती दिखाई जा रही हैं. वहीं तृणमूल कांग्रेस को 137 से 140 सीटों के बीच रखा गया है. पहले के आकलन में तृणमूल को बढ़त थी, लेकिन एग्जिट पोल के बाद यह रुख बदल गया. बाजार में यह बदलाव मतदान खत्म होने और नई सूचनाओं के आधार पर किया गया है.
भवानीपुर सीट पर भी असर
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की भवानीपुर सीट को लेकर भी सट्टा बाजार का रुख थोड़ा कमजोर हुआ है. पहले इस सीट को सुरक्षित माना जा रहा था, लेकिन अब यहां मुकाबला कड़ा माना जा रहा है. जानकारों का कहना है कि यह बदलाव पूरे राज्य के माहौल में आए बदलाव का संकेत देता है.
मतदान प्रतिशत बना अहम कारक
पश्चिम बंगाल में 92 प्रतिशत से ज्यादा मतदान ने समीकरण बदल दिए हैं. सट्टा बाजार और एग्जिट पोल दोनों में इस उच्च मतदान को निर्णायक माना जा रहा है. अलग-अलग दल इसे अपने पक्ष में बता रहे हैं, जबकि बाजार के खिलाड़ी इसे वोटरों की सक्रियता के रूप में देख रहे हैं, जिसने मुकाबले को और टक्कर का बना दिया है.
अन्य राज्यों में स्थिर रुझान
बंगाल के अलावा बाकी राज्यों में ज्यादा बदलाव नहीं दिख रहा है. असम में भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन को बढ़त मिलती दिखाई दे रही है. तमिलनाडु में डीएमके गठबंधन के सत्ता में लौटने की उम्मीद बरकरार है. केरल में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ को बढ़त मिलने का अनुमान लगाया जा रहा है, जो पारंपरिक सत्ता परिवर्तन के पैटर्न से मेल खाता है.
क्या कहते हैं जानकार?
विशेषज्ञ मानते हैं कि सट्टा बाजार का अनुमान पूरी तरह भरोसेमंद नहीं होता. यह बाजार लोगों की धारणा, स्थानीय सूचनाओं और लेनदेन के आधार पर चलता है. दिल्ली के एक कारोबारी के अनुसार, ये आंकड़े तेजी से बदल सकते हैं और इन्हें अंतिम नतीजा नहीं माना जाना चाहिए. असली तस्वीर मतगणना के दिन ही सामने आएगी.