चालू आपूर्ति वर्ष (नवंबर 2023-अक्टूबर 2024) में चीनी मिलों और डिस्टिलरी ने 30 जून तक ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को 401 करोड़ लीटर इथेनॉल की आपूर्ति की है. इसमें से 211 करोड़ लीटर यानी 52.7% मक्का और टूटे अनाज का यूज कर इथेनॉल बनाया गया था. वही, गन्ना से बाकी 190 करोड़ लीटर का उत्पादन हुआ. ये पहली बार है कि भारत के इथेनॉल उत्पादन में अनाज का योगदान 50% से ज्यादा हो गया है.
इथेनॉल 99.9% शुद्ध अल्कोहल है जिसे पेट्रोल के साथ मिलाया जा सकता है. ये 96% अतिरिक्त नेचुरल अल्कोहल से अलग है जिसका उपयोग पीने योग्य शराब बनाने के लिए किया जाता है या 94% रेक्टिफाइड स्पिरिट का उपयोग पेंट, सौंदर्य प्रसाधन, फार्मास्यूटिकल्स और अन्य इंडस्ट्रीयल प्रोडक्ट्स में किया जाता है.
नरेंद्र मोदी-नेतृत्व वाली NDA सरकार ने 2025 तक पेट्रोल में 20% इथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य रखा है. अखिल भारतीय स्तर पर ये अनुपात इस आपूर्ति वर्ष में जून तक औसतन 13% रहा, जबकि 2022-23 में यह 12.1%, 2021-22 में 10% और 2013-14 में केवल 1.6% था. वर्ष 2023-24 में हर महीने इसमें बढ़ोतरी हुई है. नवंबर में ये 10.2%, दिसंबर में 11.2%, जनवरी में 12.2%, फरवरी में 12.9%, मार्च में 12.8%, अप्रैल में 12.7%, मई में 15.4% और जून में 15.9% था.
साल 2017-18 तक इथेनॉल का उत्पादन केवल सी-हैवी गुड़ से किया जा रहा था, जो सुक्रोज युक्त घने गहरे भूरे रंग का तरल बाय-प्रोडक्ट होता है. इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (ईबीपी) कार्यक्रम को 2018-19 में बढ़ावा मिला, जब मोदी सरकार ने मिलों को पहले के 'बी-हैवी' चरण के गुड़ और सीधे पूरे गन्ने के रस/सिरप से उत्पादन करने में सक्षम बनाया. चीनी के कम/शून्य उत्पादन से होने वाले राजस्व की भरपाई के लिए मिलों को इन मार्गों के माध्यम से इथेनॉल के लिए उच्च कीमतों का भुगतान किया गया था.
इस कार्यक्रम को और बढ़ावा तब मिला जब मिलों ने पूरक फीडस्टॉक के रूप में अनाज का उपयोग करना शुरू किया. त्रिवेणी इंजीनियरिंग एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड (टीईआईएल), डीसीएम श्रीराम, धामपुर शुगर मिल्स, बलरामपुर चीनी, ईआईडी पैरी और निरानी शुगर्स जैसी कंपनियों ने मल्टी-फीडस्टॉक डिस्टिलरी स्थापित कीं जो पेराई सीजन (नवंबर-अप्रैल) के दौरान गुड़ और जूस/सिरप पर और ऑफ-सीजन (मई-अक्टूबर) में अनाज पर चल सकती थीं, जब गन्ना उपलब्ध नहीं था.
अनाज ज़्यादातर टूटे चावल थे जिन्हें भारतीय खाद्य निगम (FCI) के स्टॉक और खुले बाज़ार से खरीदा गया था. लेकिन मोदी सरकार ने FCI चावल की आपूर्ति (जुलाई 2023 से) रोक दी है और इथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ने के रस और बी-हैवी गुड़ के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा दिया है.
सरकार ने मक्के से उत्पादित इथेनॉल के लिए 71.86 रुपये प्रति लीटर की एक्स-डिस्टिलरी कीमत तय करके भी इसे प्रोत्साहित किया है. यह तेल कंपनियों द्वारा अन्य फीडस्टॉक्स से इथेनॉल के लिए प्रति लीटर भुगतान की जाने वाली कीमतों से अधिक है.