श्रमिकों की बल्ले-बल्ले! अब बढ़ेगी पेंशन और न्यूनतम मजदूरी, संसदीय समिति ने सरकार को सौंपी रिपोर्ट

संसदीय समिति ने न्यूनतम पेंशन और मजदूरी बढ़ाने की सिफारिश की है. गिग वर्कर्स का ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य होगा. जुलाई 2027 तक 3.5 करोड़ नौकरियां पैदा करने और नई श्रम संहिताओं को लागू करने पर जोर दिया गया है.

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Kanhaiya Kumar Jha

नई दिल्ली: देश के करोड़ों श्रमिकों के लिए संसदीय स्थायी समिति ने बड़ी खुशखबरी दी है. समिति के अध्यक्ष बसवराज बोम्मई ने लोकसभा में वर्ष 2026-27 के लिए अनुदान मांगों पर रिपोर्ट पेश की है. इस रिपोर्ट में श्रमिकों की आर्थिक स्थिति और सामाजिक सुरक्षा सुधारने के लिए कई क्रांतिकारी सिफारिशें की गई हैं. इसका मुख्य उद्देश्य बढ़ती महंगाई के बीच पेंशनभोगियों और दिहाड़ी मजदूरों को सम्मानजनक जीवन सुनिश्चित करना और श्रम बाजार को अधिक पारदर्शी बनाना है.

संसदीय पैनल ने ईपीएस-1995 योजना के तहत दी जा रही न्यूनतम मासिक पेंशन को बहुत कम माना है. वर्तमान में यह राशि मात्र 1000 रुपये है, जो बुजुर्गों के लिए जीवन निर्वाह हेतु नाकाफी है. समिति ने सिफारिश की है कि बढ़ती महंगाई और जीवनयापन के खर्चों को देखते हुए इस पेंशन राशि में जल्द से जल्द बढ़ोतरी की जानी चाहिए. इससे रिटायर हो चुके लाखों कामगारों को आर्थिक सहारा मिलेगा.

गिग वर्कर्स का पंजीकरण 

नई अर्थव्यवस्था के स्तंभ माने जाने वाले गिग और प्लेटफॉर्म कर्मचारियों को मुख्यधारा में लाने के लिए ई-श्रम पोर्टल पर उनका पंजीकरण अनिवार्य करने का प्रस्ताव दिया गया है. समिति का कहना है कि एग्रीगेटर कंपनियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए ताकि इन श्रमिकों को बीमा और दुर्घटना कवरेज का लाभ मिल सके. यह कदम इन अस्थाई कर्मचारियों को भविष्य में सामाजिक सुरक्षा का एक मजबूत आधार प्रदान करेगा.

मजदूरी और बीमा कवरेज 

मजदूरी के मामले में समिति ने राष्ट्रीय न्यूनतम वेतन को बढ़ाने और समय-समय पर इसमें खुद-ब-खुद संशोधन की प्रणाली विकसित करने पर बल दिया है. ठेका मजदूरों के लिए ईएसआई और पीएफ के लाभ सुनिश्चित करने की बात भी कही गई है. समिति ने केंद्र और राज्य सरकारों से मांग की है कि वे इन नियमों के पालन के लिए कड़ी निगरानी व्यवस्था बनाएं ताकि श्रमिकों के साथ कोई अन्याय न हो.

बाल श्रम और रोजगार लक्ष्य 

बाल श्रम को खत्म करने के लिए समिति ने पुराने ढांचों में सुधार और सर्व शिक्षा अभियान के साथ विलय की योजना पर दोबारा सोचने का सुझाव दिया है. रोजगार सृजन की दिशा में प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना की नियमित समीक्षा की जाएगी. जुलाई 2027 तक देश में साढ़े तीन करोड़ रोजगार के अवसर पैदा करने के लक्ष्य को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं.

नियामक सुधार और सुरक्षा 

खान सुरक्षा विभाग में खाली पड़े पदों को भरने और आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल से श्रम कानूनों का पालन सुनिश्चित करने की सिफारिश की गई है. केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर सहयोग के लिए एक स्थायी बोर्ड के गठन का सुझाव रिपोर्ट में शामिल है. समिति का मानना है कि इन नियामक सुधारों से श्रम बाजार अधिक अनुशासित होगा और श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा का एक नया युग शुरू होगा.