नई दिल्ली: स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट SIPRI की वर्ष 2026 की रिपोर्ट ने दक्षिण एशिया की सुरक्षा स्थिति को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है. रिपोर्ट के अनुसार मई 2025 में भारत द्वारा चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के महत्वपूर्ण सैन्य और मिसाइल ठिकानों पर सटीक हमले किए गए थे. इसके साथ ही रिपोर्ट में भारत और पाकिस्तान के परमाणु हथियारों की मौजूदा स्थिति, सैन्य रणनीति में बदलाव और साइबर युद्ध के बढ़ते महत्व पर भी विस्तार से प्रकाश डाला गया है.
SIPRI की रिपोर्ट के मुताबिक ऑपरेशन सिंदूर केवल एक सीमित सैन्य कार्रवाई नहीं था बल्कि यह भारत की रणनीतिक क्षमता का प्रदर्शन भी माना गया. रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय सैन्य बलों ने पाकिस्तान के कुछ ऐसे एयरबेस और मिसाइल ठिकानों को निशाना बनाया जिनका संबंध उसकी सामरिक सुरक्षा व्यवस्था से जोड़ा जाता है. इनमें नूर खान एयरबेस और किराना हिल्स जैसे क्षेत्रों का भी उल्लेख किया गया है. रिपोर्ट का दावा है कि इन हमलों ने पाकिस्तान की उस रणनीति को चुनौती दी जिसके तहत वह लंबे समय से अपने परमाणु कार्यक्रम को सुरक्षा कवच के रूप में प्रस्तुत करता रहा है. इस खुलासे के बाद क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों को लेकर नई बहस शुरू हो गई है.
रिपोर्ट में दोनों देशों के परमाणु भंडार के ताजा आंकड़े भी साझा किए गए हैं. SIPRI के अनुसार जनवरी 2026 तक भारत के पास लगभग 190 परमाणु वॉरहेड्स हैं जबकि पाकिस्तान के पास 170 वॉरहेड्स मौजूद हैं. रिपोर्ट यह भी बताती है कि भारत ने पिछले एक वर्ष के दौरान अपने परमाणु आधुनिकीकरण कार्यक्रम को गति दी है. चीन और पाकिस्तान से जुड़ी सुरक्षा चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए नई क्षमताओं को शामिल किया गया है. विशेषज्ञों का मानना है कि हथियारों की संख्या के साथ-साथ उनकी तैनाती और संचालन क्षमता भी किसी देश की सामरिक ताकत को निर्धारित करती है जिसमें भारत लगातार सुधार कर रहा है.
SIPRI की रिपोर्ट का एक महत्वपूर्ण हिस्सा आधुनिक युद्ध तकनीकों से जुड़ा है. रिपोर्ट में कहा गया है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पारंपरिक सैन्य कार्रवाई के साथ-साथ साइबर ऑपरेशन्स का भी इस्तेमाल किया गया. दोनों देशों ने डिजिटल माध्यमों से सैन्य संचार और नेटवर्क को प्रभावित करने की कोशिश की. इसके अलावा रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि भारत ने शांतिकाल में सीमित संख्या में कुछ परमाणु वॉरहेड्स को परिचालन स्थिति में रखा है. विशेषज्ञ इसे भारत की जवाबी हमले की क्षमता को और मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मान रहे हैं. इससे यह संकेत मिलता है कि भविष्य के युद्ध केवल सीमाओं पर नहीं बल्कि डिजिटल और रणनीतिक स्तर पर भी लड़े जाएंगे.