Independence Day 2026

ऑपरेशन सिंदूर की आवाज कर्नल सोफिया कुरैशी होंगी सम्मानित, पाकिस्तान के झूठ का किया था पर्दाफाश

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के दावों को सार्वजनिक मंच पर तथ्यों से खारिज करने वाली कर्नल सोफिया कुरैशी को 77वें गणतंत्र दिवस पर विशिष्ट सेवा मेडल देने का ऐलान हुआ है. यह सम्मान उनकी नेतृत्व क्षमता और सेवा को मान्यता देता है.

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Kanhaiya Kumar Jha

नई दिल्ली: नई दिल्ली में भारतीय सेना की सीनियर अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज है. केंद्र सरकार ने 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर उन्हें विशिष्ट सेवा मेडल देने की घोषणा की है. मई 2025 में पाकिस्तान के खिलाफ चले ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उन्होंने सेना की ओर से मीडिया को जानकारी देने की जिम्मेदारी निभाई थी. उनकी संतुलित और तथ्य आधारित ब्रीफिंग ने न केवल देश में भरोसा बढ़ाया बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी भारत का पक्ष स्पष्ट किया.

पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया और इस संवेदनशील अभियान के दौरान कर्नल सोफिया कुरैशी को भारतीय सेना की आधिकारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस का चेहरा बनाया गया. उन्होंने पूरे घटनाक्रम को स्पष्ट शब्दों में सामने रखा. सेना की रणनीति, लक्ष्यों और कार्रवाई की जानकारी उन्होंने बिना उत्तेजना के साझा की, जिससे सरकार और सेना की विश्वसनीयता और मजबूत हुई.

पाकिस्तान के दावों को किया खारिज

ऑपरेशन के दौरान पाकिस्तान की ओर से लगातार झूठे और भ्रामक दावे सामने आए. इन दावों का जवाब देने के लिए कर्नल सोफिया कुरैशी के साथ भारतीय वायुसेना की विंग कमांडर व्योमिका सिंह भी मीडिया के सामने आईं. दोनों अधिकारियों ने साझा ब्रीफिंग में तथ्यों और आंकड़ों के जरिए पाकिस्तान की बातों को गलत साबित किया. उनकी प्रस्तुति को देश के साथ साथ विदेशों में भी गंभीरता से सुना गया.


पहलगाम हमला और भारत की कार्रवाई

अप्रैल 2025 में जम्मू कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया था. इस हमले में 26 भारतीय पर्यटकों की मौत हुई थी. घटना के बाद जनता में गहरा आक्रोश था. इसके जवाब में छह मई की रात भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान और पीओके में आतंकी ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की. चार दिनों तक चले तनाव के बाद हालात पर काबू पाया गया.

कर्नल सोफिया कुरैशी का सैन्य सफर

गुजरात के वडोदरा की रहने वाली कर्नल सोफिया कुरैशी ने महाराजा सयाजीराव यूनिवर्सिटी से बायोटेक्नोलॉजी में पढ़ाई की. बाद में वह भारतीय सेना की सिग्नल कोर से जुड़ीं. संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशन में भारतीय टुकड़ी का नेतृत्व करने वाली वह पहली महिला अधिकारी रही हैं. वर्ष 2016 में पुणे में हुए एक्सरसाइज फोर्स 18 में भी उन्होंने अहम भूमिका निभाई थी.

महिला अधिकारियों के लिए प्रेरणा

सेना में कर्नल सोफिया कुरैशी का सफर नई पीढ़ी की महिला अधिकारियों के लिए मिसाल माना जाता है. विशिष्ट सेवा मेडल का ऐलान उनके अनुशासन, समर्पण और नेतृत्व क्षमता को सम्मान देता है. रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उनकी भूमिका ने यह दिखाया कि आधुनिक युद्ध में रणनीति के साथ संचार कितना अहम है. उनका योगदान भारत की सैन्य और कूटनीतिक ताकत को भी दर्शाता है.