बांग्लादेश की तर्ज पर म्यांमार सीमा पर रुकेगी घुसपैठ, कंटीले तार लगाकर बंद की जाएगी मुक्त आवाजाही

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि भारत म्यांमार के साथ साझा मुक्त आवाजाही व्यवस्था को खत्म कर देगा और पड़ोसी देश के साथ सीमा पर बाड़ का निर्माण करेगा.

Avinash Kumar Singh

नई दिल्ली: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि भारत म्यांमार के साथ साझा मुक्त आवाजाही व्यवस्था को खत्म कर देगा और पड़ोसी देश के साथ सीमा पर बाड़ का निर्माण करेगा. उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि देश को तीन साल के भीतर माओवादी उग्रवाद से छुटकारा मिल जाएगा.

भारत-म्यांमार सीमा पर बाड़ लगाने का फैसला 

असम पुलिस की पांच नव गठित कमांडो बटालिन के पहले बैच की पासिंग आउट परेड को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा "प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने पूरी भारत-म्यांमार सीमा पर बाड़ लगाने का फैसला किया है, जैसा कि बांग्लादेश के साथ सीमा पर किया गया है. सरकार म्यांमार के साथ मुक्त आवाजाही समझौता पर पुनर्विचार कर रही है और अब यह सुविधा जो मुक्त आवाजाही की अनुमति देती है उसे बंद कर दी जाएगी ताकि बांग्लादेश से लगी सीमा की तरह इसकी सुरक्षा की जा सके."

जानें क्या है मुक्त आवाजाही व्यवस्था?

भारत और म्यांमार पूर्वोत्तर के चार राज्यों  मिजोरम, नागालैंड, मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश में 1,643 किमी लंबी सीमा साझा करते हैं. मुक्त आवाजाही व्यवस्था सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को बिना वीजा के दूसरे देश के अंदर 16 किमी तक यात्रा करने की अनुमति देती है. 

मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा की बड़ी प्रतिक्रिया 

गृह मंत्री अमित शाह की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने कहा कि उनकी सरकार केंद्र की योजना का विरोध करती है लेकिन उसके पास इसे रोकने का अधिकार नहीं है. अगर केंद्र भारत-म्यांमार सीमा पर बाड़ लगाने और मुक्त आवाजाही व्यवस्था (एफएमआर) को खत्म करने की योजना पर आगे बढ़ता है, तो हमारे पास इसे रोकने का कोई अधिकार नहीं है. मिजोरम और म्यांमार के बीच की सीमा अंग्रेजों द्वारा तय की गई थी और दोनों तरफ के मिजो लोग इसे स्वीकार नहीं करते हैं. 

'नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में हिंसा की घटनाओं में कमी'

अपने संबोधन में अमित शाह ने कहा कि केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार आने के बाद से पिछले 10 वर्षों में भारत के आंतरिक सुरक्षा में काफी बदलाव आया है. पिछले 10 वर्षों में पूर्वोत्तर, जम्मू-कश्मीर और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में हिंसा की घटनाओं में 73% की कमी आई है. यह हम सभी के लिए खुशी की बात है. पिछले पांच वर्षों में असम की कानून व्यवस्था की स्थिति में बड़ा बदलाव आया है. लगभग सभी सशस्त्र आतंकवादी समूहों ने शांति समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं, युवा मुख्यधारा में शामिल हो गए हैं और सशस्त्र बल (विशेष शक्तियां) अधिनियम के प्रावधानों के तहत आने वाले क्षेत्र में भी काफी कमी आई है.