सोने का लालच न करें! यहां समझें क्यों PM मोदी ने की भारत के लोगों से की डॉलर बचाने की अपील?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब से लोगों से पेट्रोल-डीजल और सोना ना खरीदने की अपील की है, तब से लोगों के मन में कई सवाल है. तो चलिए जानते हैं क्या है इस अपील के मायने?

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Shanu Sharma

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की जनता से सोना ना खरीदने की अपील की है. साथ ही साथ यात्रा कम कर के और पर्सनल गाड़ियों का इस्तेमाल ना कर के पेट्रोल-डीजल बचाने पर भी जोर दिया है. लेकिन क्या आपको पता है कि ऐसा उन्होंने क्यों किया?

विपक्षी नेताओं द्वारा सरकार के इस अपील के बाद कई गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं. कोई इसे पीएम मोदी का फेलियर बता रहा है तो कोई इसे लॉकडाउन 2.O की चेतावनी बता रहा है. लेकिन हम आपको बता दें कि यह सारा मामला विदेशी मुद्रा को बचाने और अपने देश के रुपये को मजबूत करने का है. तो चलिए जानते हैं क्या कहना चाहते हैं प्रधानमंत्री मोदी.

देश में मिल रहा पेट्रोल-डीजल फिर क्यों की अपील?

अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण ना केवल भारत बल्कि पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था पर असर देखने को मिल रहा है. खासकर उन देशों पर जो अपनी जरुरत के लिए दूसरे देशों पर निर्भर है. भारत भी उन देशों में शामिल है जो कच्चा तेल, सोना और सेमीकंडक्टर से बनी चीजों के लिए दूसरे देशों पर निर्भर करता है. अब समझते हैं कि पीएम मोदी ने यह अपील क्यों की. देश में अभी भी पेट्रोल-डीजल मिल रहा है और उसी दाम पर मिल रहा है. सोना के रेट हाई हैं लेकिन उपलब्ध है, इसके बाद भी पीएम मोदी ने यह अपील कर के विपक्ष को आरोप लगाने का मौका क्यों दिया? 

दरअसल, पीएम मोदी का मकसद जनता को डराने का नहीं बल्कि आने वाले किसी भी परिस्थिति के लिए पहले से तैयार करना है. जब भी दो देशों में जंग होता है तो उसका असर पूरे विश्व पर पड़ता है. अमेरिका-ईरान युद्ध में भी ऐसा ही हो रहा है. इस पूरे स्टोरी में आपको इन सवालों का जवाब मिलेगा.

  • पीएम मोदी ने लोगों को सोना खरीदने से क्यों मना किया?
  • भारत अगर कच्चा तेल कम खरीदता है तो क्या होगा?
  • भारत अपने फॉरेक्स रिजर्व को कैसे बचा सकता है? 

भारत तेल के लिए दूसरे देशों पर निर्भर

अमेरिका-ईरान के बीच चल रहे युद्ध के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज प्रभावित हो चुका है. जिसके कारण तेल का सप्लाई चेन प्रभावित हो गया है. अब इसका सीधा असर हमारे विदेशी मुद्रा यानी फॉरेक्स पर पड़ रहा. कच्चे तेल महंगे हो गए हैं, जिसे खरीदने के लिए हमें ज्यादा फॉरेक्स खर्च करना पड़ रहा है.

इस बात को समझिए की हमारे देश में इस्तेमाल किए जाने वाला लगभग 90 प्रतिशत तेल और भारी मात्रा में सोना दूसरे देशों से आता है और इसे खरीदने के लिए रुपये नहीं बल्कि डॉलर, यूरो और पाउंड देना पड़ता है. अब जब दाम ज्यादा बढ़ेंगे तो पहले से जमा किए गए डॉलर भी ज्यादा खर्च होंगे. जिससे देश की सेविंग खत्म होगी और हम धीरे-धीरे दवाब में आ जाएंगे. विदेशी मुद्राओं को बचाने के लिए मोदी सरकार लोगों से यह अपील कर रही है कि ज्यादा तेल बचाए ताकी हमारे विदेशी मुद्रा भंडार बच सके. 

फॉरेक्स रिजर्व और रुपये पर कंट्रोल की कोशिश

पीएम मोदी के अपील के पीछे दो कारण पहला कि विदेशी मुद्रा भंडार बचाया जा सके और दूसरा रुपया को कमजोर होने से रोका जा सके. अभी रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपने निचले स्तर 95.50 पर पहुंच गया. यानी एक डॉलर के  लिए आपको 95 रुपये से भी ज्यादा देना पड़ेगा. जैसा की मैने पहले भी बताया कि दूसरे देशों से आने वाली अधिकतर वस्तुओं को डॉलर, यूरो या फिर पाउंड में खरीदा जाता है, तो इसके लिए आपको अपने रुपये देकर पहले डॉलर खरीदने पड़ेंगे.

एक डॉलर खरीदने के लिए आपको 95 रुपये से ज्यादा देना पड़ेगा, लेकिन अगर हम विदेश से आने सामानों को कम खरीदते हैं तो अभी के लिए आपका पैसा बच जाएगा और रुपये की स्थिति मजबूत होगी. इसलिए पीएम मोदी ने लोगों से अपील की है कि वह इस समय पर अपने रुपयों को बचाएं, इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि हमारी अर्थव्यवस्था खतरे में है. हम अगर अभी अपने फॉरेक्स रिजर्व को बचाते हैं तो किसी भी खराब परिस्थितियों में देश को मजबूत बना पाएंगे. क्योंकि जिस देश के पास जितना ज्यादा फॉरेक्स रिजर्व होता है, उसे वैश्विक बाजार में उतना ज्यादा भरोसेमंद माना जाता है और उसके साथ व्यापार करने के लिए कोई भी देश आसानी से तैयार रहता है.