छत्तीसगढ़ में खाद्य अधिकारी ने ही किया करोड़ों का LPG घोटाला, जब्त टैंकरों से निकाल ली गैस
छत्तीसगढ़ के महासमुंद में 1.5 करोड़ रुपये के LPG घोटाले का खुलासा हुआ है. आरोप है कि जब्त टैंकरों से अवैध गैस निकाली गई. मामले में जिला खाद्य अधिकारी समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है.
रायपुर: छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है. यहां के जिला खाद्य अधिकारी पर 1.5 करोड़ रुपये के LPG घोटाले का बड़ा आरोप लगा है, जिसके बाद महकमें में हड़कंप मचा हुआ है. पुलिस ने इस मामले में कड़ी कार्रवाई करते हुए 3 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि मामले की जांच जारी है.
दरअसल, साल 2025 में दिसम्बर माह में पुलिस ने आवश्यक वस्तु अधिनियम और अन्य धाराओं के तहत 6 LPG टैंकर कैप्सूल जब्त किए थे. इन टैंकरों को पहले सिंहोड़ा थाने में रखवाया गया था, लेकिन गर्मियों के मद्देनजर और सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए टैंकरों को यहां रखना मुश्किल हो रहा था, जिसके बाद जिला प्रशासन ने खाद्य विभाग को सुरक्षित स्थान की व्यवस्था करने के निर्देश दिए थे.
टैंकरों को सुरक्षित रखवाने के बदले निकाल ली गैस
जिला प्रशासन से निर्देश मिलने के बाद खाद्य विभाग ने टैंकरों को सुरक्षित रखवाने की प्रक्रिया शुरू तो कर दी, लेकिन इस पूरी प्रक्रिया के पीछे करोड़ों के घोटाले की फूल प्रूफ प्लानिंग भी छिपी थी. आरोप है कि जिला खाद्य अधिकारी अजय यादव और गौरव गैस एजेंसी के संचालक पंकज चंद्राकर के बीच बैठक हुई, जिसके बाद दोनों ने मिलकर टैंकरों से अवैध रूप से गैस निकालने की योजना बनाई. गैस निकालने की जिम्मेदारी ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स ने संभाली.
टैंकरों से गैस निकालने का सौदा 80 लाख में तय हुआ, जिसमें से जिला खाद्य अधिकारी अजय यादव को 50 लाख रुपये मिलने थे. पंकज चंद्राकर के हिस्से में 20 लाख और मनीष चौधरी को 10 लाख रुपये मिलने थे. पुलिस का कहना है कि सुपुर्दगी प्रक्रिया पूरी होते ही अजय यादव को उसका हिस्सा दे दिया गया था, जबकि बाकी रकम नकद और अस्थायी बैंक ट्रांसफर के जरिए संभाली गई.
पुलिस जांच में हुए चौंकाने वाले खुलासे
40 सदस्यीय पुलिस टीम की गहन जांच में ये खुलासा हुआ कि इन जब्त टैंकरों में 100 मीट्रिक टन से ज्यादा एलपीजी थी, लेकिन एक हफ्ते के अंदर ही इनमें से 92 मीट्रिक टन एलपीजी निकाल ली गई और इस तरह से सरकारी प्रक्रिया की आड़ में बड़े घोटाले को अंजाम दिया गया. पुलिस ने सभी टैंकरों की सूक्षमता से जांच की और इस बात को खारिज कर दिया कि टैंकर में रिसाव की वजह से एलपीजी की मात्रा कम हुई. पुलिस जांच में ये स्पष्ट हो गया कि टैंकरों से अवैध तरीके से ही गैस की निकासी हुई और बड़े घोटाले को अंजाम दिया गया.
पुलिस जांच में सामने आए तथ्यों से खाद्य विभाग में हड़कंप मच गया. वही इस मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए जिला खाद्य अधिकारी अजय यादव, गैस एजेंसी संचालक पंकज चंद्राकर और रायपुर निवासी मनीष चौधरी को गिरफ्तार कर लिया है. मामले की विस्तृत जांच अभी जारी है.
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