नई दिल्ली: पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले के करीब आठ महीने बाद राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने बड़ा खुलासा किया है. एनआईए की चार्जशीट में पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा और उसके सहयोगी संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट को हमले का जिम्मेदार ठहराया गया है.
इस हमले में 26 लोगों की जान गई थी, जिनमें अधिकतर पर्यटक थे. जांच में सामने आया है कि हमले की साजिश सीमा पार से रची गई थी.
एनआईए ने इस मामले में सात आरोपियों के खिलाफ 1,597 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है. इसमें पांच आरोपी व्यक्ति और दो आतंकी संगठन- लश्कर-ए-तैयबा और टीआरएफ- शामिल हैं. एजेंसी के अनुसार, इन संगठनों ने हमले की योजना बनाई, आतंकियों को मदद पहुंचाई और वारदात को अंजाम दिलाया. चार्जशीट में पाकिस्तान की भूमिका को विस्तार से दर्ज किया गया है.
चार्जशीट के मुताबिक, लश्कर का शीर्ष कमांडर साजिद जट्ट पहलगाम हमले का मुख्य हैंडलर था. वह टीआरएफ का ऑपरेशनल चीफ भी बताया गया है. साजिद जट्ट को अक्टूबर 2022 में यूएपीए के तहत व्यक्तिगत आतंकवादी घोषित किया जा चुका है. जांच एजेंसियों का मानना है कि वह पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद से आतंकी गतिविधियों का संचालन करता है.
एनआईए ने तीन पाकिस्तानी आतंकियों- सुलेमान शाह, हबीब ताहिर उर्फ जिब्रान और हमजा अफगानी के नाम भी चार्जशीट में शामिल किए हैं. ये तीनों जुलाई में श्रीनगर के पास सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में मारे गए थे. जांच में पुष्टि हुई कि ये सभी लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े थे और पहलगाम हमले में सक्रिय भूमिका निभा चुके थे.
जांच में दो स्थानीय आरोपियों, परवेज अहमद और बशीर अहमद, की भूमिका भी सामने आई है. इन पर आतंकियों को शरण देने और मदद पहुंचाने का आरोप है. दोनों को जून में गिरफ्तार किया गया था. सभी आरोपियों और संगठनों पर भारतीय न्याय संहिता, आर्म्स एक्ट और गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम के तहत केस दर्ज किया गया है.
एनआईए के अनुसार, साजिद जट्ट कश्मीर में भर्ती, फंडिंग और घुसपैठ का बड़ा चेहरा है. वह हाइब्रिड आतंकियों को भी लॉजिस्टिक और ऑपरेशनल सहायता देता रहा है. उसके नाम 2023 के धांगरी नरसंहार, पूंछ में एयरफोर्स काफिले पर हमला और रियासी बस हमले जैसे मामलों से भी जुड़ा है. एजेंसियां उसे कश्मीर के आतंकी नेटवर्क का सबसे खतरनाक चेहरा मानती हैं.