ट्रैफिक नियम तोड़े तो सस्पेंड होगा DL! जानें नए नियमों में क्या है पेनल्टी प्वाइंट्स की भूमिका

ड्राइविंग लाइसेंस और व्हीकल सर्विसेज को लेकर अहम नियम बदले जा सकते हैं. क्या-क्या संभावित बदलाव किए जाने पर विचार किया जा रहा है, चलिए जानते हैं.

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Shilpa Srivastava

नई दिल्ली: केंद्र सरकार भारत में ड्राइविंग लाइसेंस और व्हीकल सर्विसेज से जुड़े कई अहम बदलावों की योजना बना रही है. इन बदलावों पर केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय चर्चा कर रहा है. इन बदलावों का मुख्य उद्देश्य गैर जरूरी कागजी कार्रवाई और देरी को कम करना है. इनमें एक बड़ा बदलाव 40 से 60 साल की उम्र के लोगों से जुड़ा है, जो अपने ड्राइविंग लाइसेंस के रिन्यूअल के लिए अप्लाई करते हैं. इस उम्र के लोगों को रिन्यू कराने के लिए उन्हें मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट जमा करना होता है. 

सरकार इस उम्र के लोगों के लिए इस जरूरत को खत्म करने का प्लान बना रही है. अधिकारियों का कहना है कि ज्यादातर मामलों में, इन मेडिकल सर्टिफिकेट को सिर्फ एक औपचारिकता माना जाता है और शायद ही कभी उनकी ठीक से जांच की जाती है. इस नियम को हटाने से कागजी कार्रवाई कम होगी और समय बचेगा. 60 साल और उससे ज़्यादा उम्र के लोगों के लिए मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट अभी भी जरूरी होंगे.

पेनल्टी प्वाइंट सिस्टम होगा शुरू:

एक और अहम प्रस्ताव भी लाया जा रहा है, जिसमें ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन के लिए पेनल्टी प्वाइंट सिस्टम शुरू किया जाएगा. इस सिस्टम के तहत, जब भी कोई ड्राइवर ट्रैफिक नियमों को तोड़ेगा और उसे ई-चालान मिलेगा, तो उसके ड्राइविंग लाइसेंस में पेनल्टी प्वाइंट जोड़ दिए जाएंगे. अगर कोई ड्राइवर समय के साथ बहुत ज्यादा प्वाइंट जमा कर लेता है, तो उसका लाइसेंस कुछ समय के लिए सस्पेंड किया जा सकता है या उसके ड्राइविंग के अधिकार सीमित किए जा सकते हैं. 

इसके अलावा सरकार इन पेनल्टी प्वाइंट को मोटर इंश्योरेंस से जोड़ने के बारे में भी सोच रही है. इसका मतलब है कि जो ड्राइवर बार-बार ट्रैफिक नियम तोड़ते हैं, उन्हें ज्यादा इंश्योरेंस प्रीमियम देना पड़ सकता है, जबकि सुरक्षित ड्राइवरों को फायदा हो सकता है.

ड्राइविंग लाइसेंस में जोड़ा जा सकता है नया सिस्टम:

सरकार ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया को बेहतर बनाने पर भी काम कर रही है. इसका मकसद सिस्टम को आसान बनाना है. साथ ही यह भी सुनिश्चित करना है कि केवल काबिल और ट्रेन्ड ड्राइवरों को ही लाइसेंस मिले. ड्राइविंग टेस्ट और अप्रूवल में देरी को कम करने के लिए टेक्नोलॉजी का ज्यादा इस्तेमाल करने की योजना है. 

इसके अलावा, सभी ड्राइविंग लाइसेंस धारकों को जल्द ही अपने मोबाइल नंबर और घर का पता डिजिटल रूप से अपडेट करना पड़ सकता है. इससे ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी को रिकॉर्ड अपडेट रखने, ड्राइवरों से आसानी से संपर्क करने और ट्रैफिक नियमों के इलेक्ट्रॉनिक एनफोर्समेंट को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी. इसके अलावा एक और बड़ा बदलाव किया जा सकता है, जिसमें व्हीकल ओनरशिप के ट्रांसफर के लिए पूरी तरह से ऑनलाइन सिस्टम कर दिया जाएगा.