नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ सख्त कदम उठाया है. उन्होंने ईरान में चल रहे विरोध-प्रदर्शन का समर्थन करते हुए उन सभी देशों को चेतावनी दी है जो ईरान के साथ अपने व्यापार के दरवाजे खुले रखे हैं, उन्हें इसकी भरपाई करनी होगी. उनपर अतिरिक्त 25% टैरिफ की घोषणा की गई. हालांकि ट्रंप के इस फैसले से भारत पर कितना असर पड़ेगा इस बात की को समझने की जरूरत है.
नई दिल्ली और तेहरान के बीच फिलहाल 2 बिलियन डॉलर से भी कम का कारोबार चल रहा है. ऐसे में भारत पर बहुत हल्का असर होने की उम्मीद है. ऐसा इसलिए भी कहा जा रहा है क्योंकि भारत ईरान के टॉप 50 वैश्विक व्यापारिक साझेदारों में शामिल नहीं है.
ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शन के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि तत्काल प्रभाव से उन सभी देशों पर 25 प्रतिशत का टैरिफ लगाया जाता है जो ईरान के साथ बिजनेस करने का इरादा रखते हैं. इन सभी देशों को अमेरिका के साथ चल रहे व्यापारों पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ देना होगा. यह आदेश अंतिम और निर्णायक है. अगर यह भारत पर लागू होता है, तो यह पहले से लागू 50% टैरिफ में जुड़ जाएगा, जिसमें रूसी एनर्जी खरीद पर 25% का दंडात्मक टैक्स भी शामिल है.
भारत ने मई 2019 में ईरान से तेल आयात करना बंद कर दिया था, जो कभी दोनों देशों के बीच व्यापार में मुख्य वस्तु थी. डोनाल्ड ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल के दौरान ही ईरान पर कई प्रतिबंध लगाए थे, इसके परिणामस्वरूप दोनों देशों के बीच व्यापार 2018-19 में 17.03 बिलियन डॉलर से घटकर मौजूदा निचले स्तर पर आ गया. लोगों ने भारत की स्थिति की तुलना ईरान के अपने मुख्य आर्थिक पार्टनर जैसे चीन, इराक, संयुक्त अरब अमीरात और तुर्किये के साथ व्यापार से की, जिनमें से सभी ने पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद हाल के सालों में व्यापार की मात्रा में बढ़ोतरी देखी.
भारतीय बैंकों ने भी पश्चिमी देशों में अपने ऑपरेशन में प्रतिबंधों के डर से पेमेंट में अपनी भागीदारी काफी कम कर दी है. हालांकि, ईरान के रणनीतिक चाबहार बंदरगाह में भारत की मौजूदगी बनी हुई है. दोनों पक्षों ने ओमान की खाड़ी में इस सुविधा पर एक टर्मिनल के विकास के लिए 10 साल का समझौता किया था.