‘अपने हक के लिए आवाज उठाना ड्यूटी’, नेहा बोरा ने पीस बॉन्ड पर साइन करने से किया इनकार

AISA अध्यक्ष नेहा बोरा ने दिल्ली हाईकोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद भी 10 हजार रुपये के पीस बॉन्ड पर हस्ताक्षर करने से इनकार किया है.

Reepu Kumari

लोकतंत्र में विरोध जताने का अधिकार कितना अहम है और उसे लेकर कानूनी कार्रवाई की सीमा क्या होनी चाहिए, इस सवाल पर दिल्ली में नया विवाद सामने आया है. ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा ने साफ कहा है कि वह पीस बॉन्ड पर हस्ताक्षर नहीं करेंगी. दिल्ली हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलने के बावजूद उन्होंने अपना रुख कायम रखा है. उनका कहना है कि इस तरह के बॉन्ड पर दस्तखत करना शांतिपूर्ण विरोध को रोकने की कार्रवाई को स्वीकार करने जैसा होगा.

बॉन्ड में क्या था?

मामला स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट की ओर से जारी उस नोटिस से जुड़ा है, जिसमें नेहा बोरा से 10 हजार रुपये का बॉन्ड भरने और शांति बनाए रखने को कहा गया था. उन्होंने इस नोटिस को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन अदालत ने उनकी याचिका खारिज कर दी. इसके बाद भी नेहा ने बॉन्ड पर हस्ताक्षर करने से इनकार करते हुए लोकतांत्रिक अधिकारों और विरोध प्रदर्शन की स्वतंत्रता का मुद्दा उठाया है.

पीस बॉन्ड पर हस्ताक्षर करने से इनकार

नेहा बोरा का कहना है कि पीस बॉन्ड पर हस्ताक्षर करने का अर्थ यह संदेश देना होगा कि शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक विरोध को रोकने के लिए भी इस प्रावधान का इस्तेमाल किया जा सकता है. उन्होंने अपने फैसले को नागरिक अधिकारों से जोड़ते हुए कहा कि वह इस कदम को स्वीकार नहीं करना चाहतीं. उनका विरोध अब केवल बॉन्ड तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके जरिए शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर लगाई जा सकने वाली पाबंदियों को लेकर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं.


वोट और विरोध को बताया नागरिक अधिकार

नेहा ने कहा कि भारत जैसे बड़े लोकतांत्रिक देश में आम लोग दो प्रमुख अधिकारों को समझते हैं. पहला, अपनी सरकार चुनने के लिए वोट देना और दूसरा, अपने अधिकारों पर हमला होने पर उसके खिलाफ आवाज उठाना. उनके मुताबिक, जब लोगों को लगता है कि मतदान का अधिकार प्रभावित हो रहा है, तो सड़कों पर उतरकर विरोध करना नागरिक जिम्मेदारी का हिस्सा बन जाता है. उन्होंने कहा कि ऐसे मुद्दों पर प्रदर्शन लोकतांत्रिक भागीदारी का माध्यम हैं.

पुलिस की कार्रवाई पर भी उठाए सवाल

नेहा बोरा ने विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर आरोप लगाए. उनका दावा है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के बजाय प्रदर्शनकारियों पर लाठियों और डंडों का इस्तेमाल किया गया. उन्होंने महिलाओं के साथ कथित दुर्व्यवहार और पत्रकारों के खिलाफ हिंसा का भी जिक्र किया. ये आरोप नेहा की ओर से लगाए गए हैं. इन घटनाओं से जुड़े सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि इस खबर में उपलब्ध जानकारी के आधार पर नहीं की जा सकती.