नई दिल्ली: घर हो बाहर महिलाएं कहीं भी सुरक्षित नहीं हैं. समाज में बैठे कुछ दरिंदे नवजात बच्चियों और बुजुर्ग औरतों को भी नहीं छोड़ते. ऐसा एक भी दिन नहीं जाता है जब रेप की खबर न आई हो. बदलते वक्त के साथ हमारा समाज खुद को अपग्रेड कर रहा है. लेकिन कुछ हिस्सा आज भी रेप जैसे वायरस से पीड़ित है. राष्ट्रीय अपराध अभिलेख ब्यूरो (NCRB) ने रेप के आंकड़ो पर एक रिपोर्ट जारी किया है. नए आंकड़ों से पता चलता है कि 2024 में बलात्कार के मामलों में गोवा टॉप पर है. यह दर प्रति एक लाख जनसंख्या पर 13.3% है. चिंता वाली बात यह भी है कि गोवा की जनसंख्या ज्यादा नहीं है और इसने उन राज्यों को भी पीछे छोड़ दिया जहां ज्यादा आबादी रहती है.
एनसीआरबी की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले वर्ष गोवा में बलात्कार के 105 मामले दर्ज किए गए, जिनमें 106 पीड़िताएं पीड़ित थीं. इस आंकड़े में राज्य में महिलाओं के खिलाफ विभिन्न प्रकार के अपराध शामिल हैं.
हमला और लज्जा भंग : लज्जा भंग करने के इरादे से हमले या आपराधिक बल प्रयोग के 42 मामले थे, जबकि चार मामले निर्वस्त्र करने के इरादे से किए गए थे.
पीछा करना और दहेज : दूसरों का पीछा करने वाले अपराधियों के खिलाफ 19 एफआईआर दर्ज की गईं और दहेज से संबंधित दो मौतें हुईं.
उत्पीड़न : सार्वजनिक परिवहन क्षेत्र में मानसिक उत्पीड़न का एक मामला सामने आया, जबकि यौन उत्पीड़न के दो मामले सामने आए.
अन्य : महिलाओं और बच्चों के खिलाफ विभिन्न अपराधों से संबंधित 276 एफआईआर दर्ज की गईं.
यह उल्लेखनीय है कि इस अवधि के दौरान तटीय राज्य में अपहरण, अगवा करने या महिलाओं को जबरन शादी के लिए मजबूर करने का एक भी मामला दर्ज नहीं किया गया.
एनसीआरबी के अनुसार, अपराध दर को कुल जनसंख्या के प्रति एक लाख लोगों पर दर्ज किए गए अपराध की दर के रूप में परिभाषित किया गया है.
2024 के मध्य-वर्ष के अनुमानों के अनुसार, गोवा के बाद, बलात्कार की सबसे अधिक घटनाएं निम्नलिखित राज्यों में दर्ज की गई हैं;
हालांकि, गोवा पुलिस बल के वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि ये आंकड़े आपराधिक घटनाओं में वृद्धि नहीं दर्शाते, बल्कि बलात्कार पीड़ितों द्वारा न्याय पाने के लिए एफआईआर दर्ज कराने की प्रक्रिया में आई आसानी को दर्शाते हैं. पुलिस मुख्यालय के एक अधिकारी ने कहा, 'महिलाओं में जागरूकता बढ़ने और गैर-सरकारी संगठनों की भागीदारी के कारण न्याय व्यवस्था तक उनकी पहुंच बेहतर हुई है. एफआईआर दर्ज न कराने के प्रति हमारी शून्य सहिष्णुता नीति ने इसे संभव बनाया है.'
उन्होंने आगे कहा, 'हम यह सुनिश्चित करते हैं कि एफआईआर के माध्यम से पुलिस स्टेशनों में दर्ज की गई सभी शिकायतें बिना किसी परेशानी के दर्ज हो जाएं.'
हालांकि, एनसीआरबी ने भी ऐसे आंकड़ों से निपटने में संकीर्ण दृष्टिकोण अपनाने के खिलाफ चेतावनी दी और बताया कि एफआईआर दर्ज होने की अधिक संख्या वास्तव में यह दर्शाती है कि नागरिकों की शिकायतों का निवारण हो रहा है.