प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने विदेशी सुपारी की कथित तस्करी और हवाला के जरिए काले धन को सफेद करने के मामले में बड़ी कार्रवाई की है. ED के गुवाहाटी जोनल कार्यालय ने 1 अक्टूबर 2026 को गुवाहाटी, सिलीगुड़ी, बागडोगरा, फांसीदेवा और कूचबिहार में कुल 16 ठिकानों पर PMLA के तहत तलाशी ली.
तलाशी के दौरान एजेंसी ने करीब 95 लाख रुपये नकद, डिजिटल डिवाइस, संपत्ति और निवेश से जुड़े दस्तावेज, बैंक रिकॉर्ड तथा अन्य आपत्तिजनक कागजात जब्त किए. इसके अलावा करीब 85 लाख रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) को फ्रीज किया गया है.
ED के मुताबिक, जांच असम और पश्चिम बंगाल पुलिस की ओर से दर्ज 11 FIR के आधार पर शुरू हुई. इससे पहले 3 जुलाई 2026 को भी 20 ठिकानों पर छापेमारी की गई थी. जांच में ऐसे नेटवर्क का पता चला जो म्यांमार से भारत के कई राज्यों तक विदेशी सूखी सुपारी पहुंचाने में सक्रिय था.
जांच के अनुसार इंडोनेशिया, थाईलैंड और म्यांमार मूल की सूखी सुपारी म्यांमार के रास्ते मिजोरम के चम्फाई जिले के सामने भारत-म्यांमार सीमा तक लाई जाती थी. जोखावथर में तियाउ नदी के रास्ते छोटे-छोटे लॉट में इसे कथित तौर पर लैंड कस्टम स्टेशन को बायपास कर भारत में लाया जाता था.
ED को जांच में यह भी पता चला कि चम्फाई जिले में सुपारी उत्पादन नहीं होता और हाल तक वहां सुपारी सुखाने या प्रोसेसिंग की इकाइयां भी नहीं थीं. इसके बावजूद स्थानीय लोगों के नाम पर फर्जी फर्में बनाई गईं. इनके GST रजिस्ट्रेशन और बैंक खातों को कथित तौर पर सिलचर से संचालित किया जाता था.
जोखावथर से सुपारी चम्फाई में इकट्ठी कर वैरेंगटे के रास्ते ट्रकों से सिलचर पहुंचाई जाती थी. इसे घरेलू माल दिखाने के लिए फर्जी GST इनवॉयस, ई-वे बिल और परिवहन दस्तावेज तैयार किए जाते थे. इसके बाद माल गुवाहाटी के गोदामों में पहुंचता, जहां उसकी दोबारा पैकिंग और दस्तावेज तैयार किए जाते थे.
ED के अनुसार, मैसर्स बीकानेर असम रोडलाइंस इंडिया लिमिटेड और उससे जुड़ी कंपनियों ने नेटवर्क में अहम भूमिका निभाई. इन कंपनियों के खातों में देशभर के सुपारी कारोबारियों से सैकड़ों करोड़ रुपये का क्रेडिट मिला. आगे सुपारी सिलीगुड़ी कॉरिडोर से उत्तर बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र तक पहुंचाई जाती थी.
जांच एजेंसी के मुताबिक, सुपारी की बिक्री से जुड़ा पैसा हवाला चैनल के जरिए रिश्तेदारों, कर्मचारियों और शेल कंपनियों के खातों में वापस आता था. इसके बाद बड़े पैमाने पर नकद निकासी और संपत्ति व वाहनों में निवेश किया जाता था. संबंधित बैंक खातों में 1,000 करोड़ रुपये से अधिक का क्रेडिट सामने आया है.
ताजा कार्रवाई DNG बायोटेक प्राइवेट लिमिटेड, जय करणी ट्रेडिंग्स प्राइवेट लिमिटेड, पूर्वोत्तर एग्रो प्राइवेट लिमिटेड, N R एसोसिएट्स और उनसे जुड़े लोगों के परिसरों पर हुई. ED ने मामले में आगे की जांच जारी रखी है.