मुंबई की 86 साल पुरानी 'आराम वड़ा पाव' की दुकान, इसका वड़ा पाव ना खाया तो क्या खाया?
1939 में श्रीरंग तांबे जिन्हें भाऊ के नाम से जाना जाता था, ने इस दुकान आराम वड़ा पाव की नींव रखी. शुरुआत में मेन्यू में चाय, कॉफी, बासुंदी, गुलाब जामुन, खीर और बटाटा वड़ा जैसे व्यंजन शामिल थे.
हर शाम छह बजे, मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CST) के सामने एक लंबी कतार लगना शुरू हो जाती है. यह कतार न तो बस के लिए है, न टैक्सी के लिए, और न ही ट्रेन टिकट के लिए. कॉलेज छात्रों से लेकर नौकरीपेशा और अनुभवी पेशेवरों तक, 25-30 लोग आउटलेट के बाहर गर्मागर्म बटाटा वड़ा और थोड़े बड़े लड़ी पाव के लिए बेसब्री से इंतजार करते हैं. यह उनका घर पहुंचने तक भूख मिटाने का तरीका है. 55 वर्षीय कौस्तुभ तांबे, जो इस व्यवसाय की तीसरी पीढ़ी से हैं, ने बताया, “हमारे वीआईपी मेहमान, जो रोज यहां आते हैं, कहते हैं कि एक वड़ा पाव और एक कप चाय उन्हें रात के खाने तक तरोताजा रखती है.”
1939 से चल रही दुकान
1939 में श्रीरंग तांबे, जिन्हें भाऊ के नाम से जाना जाता था ने इस दुकान आराम वड़ा पाव की नींव रखी. कौस्तुभ बताते हैं, “मेरे दादाजी ने कैपिटल सिनेमा बिल्डिंग में एक बंद दुकान देखी और मालिकों से संपर्क कर एक उपहार गृह शुरू करने की इच्छा जताई. तब इसे आराम मिल्क कोऑपरेटिव कहा गया.” शुरुआत में मेन्यू में चाय, कॉफी, बासुंदी, गुलाब जामुन, खीर और बटाटा वड़ा जैसे व्यंजन शामिल थे.
86 साल बाद, यह दुकान अब एक शहर का ऐतिहासिक स्थल है, जहां एक बार में 48 लोग बैठ सकते हैं. मेन्यू में अब कोथिंबीर वड़ी, थालीपीठ, झुंका भाकरी जैसे महाराष्ट्रीयन व्यंजन शामिल हैं. उपवास के लिए साबुदाना खिचड़ी, उपवास मिसल, और राजगिरा थाली भी लोकप्रिय हैं. कौस्तुभ ने कहा, “मेरी मां श्री तांबे ने रसोई कर्मचारियों को ये व्यंजन सिखाए, हमेशा गुणवत्ता और निरंतरता पर जोर दिया.”
वड़ा पाव की खासियत
1995 में शुरू हुए अलग वड़ा पाव काउंटर की कीमत तब 5 रुपये थी, जो अब 25 रुपये है. कौस्तुभ बताते हैं, “हमारे वड़े और पाव बाकियों से बड़े हैं. हम सम्राट बेसन और रिफाइंड सूरजमुखी तेल का इस्तेमाल करते हैं. रेसिपी साधारण है, लेकिन गुणवत्ता और निरंतरता ने हमें यह पहचान दी.” कौस्तुभ कहते हैं कि आउटलेट की नींव दादाजी, पिता (माधव तांबे), और चाचा (मधुकर तांबे) की मेहनत और कर्मचारियों के साथ अपनापन है. अधिकांश कर्मचारी 30-40 साल से साथ हैं.
भविष्य की योजनाएं
पिछले साल, कौस्तुभ की पत्नी बिजल तांबे के मार्गदर्शन में आउटलेट का रिनोवेशन हुआ. रसोई में इंडक्शन कुकिंग और बेहतर वेंटिलेशन जोड़ा गया. कौस्तुभ की योजना एक केंद्रीय रसोई स्थापित करने और सीएसटी-दादर के बीच नया आउटलेट खोलने की है. उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “अगले तीन साल में मुंबई में 25 आउटलेट होंगे.”