CBSE की किताब में आए के मोटू-पतलू, हंसते-हंसाते बच्चों को पढ़ाएंगे टैक्स एजुकेशन का पाठ

CBSE ने देशभर के अपने सभी संबद्ध स्कूलों को निर्देश दिया है कि वे इन कॉमिक्स को छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों तक पहुंचाएं.

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Sagar Bhardwaj

बच्चों को टैक्स जैसे जटिल विषय को मनोरंजक ढंग से सिखाने के लिए CBSE ने आयकर विभाग के साथ मिलकर एक नया प्रयोग किया है. इस पहल में बच्चों के चहेते पात्र मोटू और पतलू अब शिक्षकों की भूमिका निभाएंगे. वे मजेदार कहानियों के जरिये समझाएंगे कि टैक्स क्यों जरूरी है और यह कैसे देश के विकास की नींव रखता है.

आयकर विभाग और सीबीएसई द्वारा जारी आठ कॉमिक्स में मोटू-पतलू रोजमर्रा की स्थितियों में दिखाए गए हैं, जहां वे बच्चों को टैक्स की अहमियत बताते हैं. कहानियों के माध्यम से समझाया गया है कि टैक्स केवल सरकार के लिए राजस्व नहीं, बल्कि सड़कों, अस्पतालों, स्कूलों और सार्वजनिक सुविधाओं के निर्माण की नींव है. इन कॉमिक्स को इस तरह लिखा गया है कि बच्चे हंसते-हंसते सीख सकें.

“आजादी का अमृत महोत्सव” के तहत पहल

यह पूरी सीरीज “आजादी का अमृत महोत्सव” के अंतर्गत जारी की गई है. इसे आयकर विभाग के जनसंपर्क, प्रकाशन और प्रचार निदेशालय ने तैयार किया है. हर भाग में एक नई कहानी है जो टैक्स को समझने का सरल तरीका प्रस्तुत करती है. इसका उद्देश्य बच्चों को राष्ट्र की आर्थिक व्यवस्था के प्रति जागरूक बनाना और उनमें प्रारंभिक स्तर पर जिम्मेदारी की भावना विकसित करना है.

CBSE ने स्कूलों से की ये अपील

सीबीएसई ने देशभर के अपने सभी संबद्ध स्कूलों को निर्देश दिया है कि वे इन कॉमिक्स को छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों तक पहुंचाएं. बोर्ड ने सुझाव दिया है कि इन्हें कक्षा गतिविधियों और सह-पाठयक्रम कार्यक्रमों में शामिल किया जाए. इससे छात्रों में टैक्स अनुपालन, नागरिक जिम्मेदारी और आर्थिक समझ विकसित होगी.

कई भाषाओं में उपलब्ध कॉमिक्स

इन मोटू-पतलू कॉमिक्स को कई भारतीय भाषाओं में पढ़ा जा सकता है. आयकर विभाग ने इन्हें अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर निशुल्क उपलब्ध कराया है, ताकि देशभर के बच्चे आसानी से इन्हें पढ़ सकें. ऑनलाइन उपलब्धता के कारण यह पहल न केवल शहरों में बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों तक भी पहुंच सकेगी.

मनोरंजन के साथ सीखने का संगम

सीबीएसई का मानना है कि बच्चों को पढ़ाने का सबसे प्रभावी तरीका है- मनोरंजन के साथ शिक्षा. मोटू-पतलू टैक्स कॉमिक्स इसी सोच का उदाहरण हैं. इस पहल से उम्मीद की जा रही है कि बच्चे देश की अर्थव्यवस्था और नागरिक जिम्मेदारी को कम उम्र से ही समझना शुरू करेंगे और आगे चलकर एक जागरूक नागरिक बनेंगे.