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मालदीव को झुकना पड़ा! बदले मोहम्मद मोइज्जू के तेवर, अब इंडिया को बताया खास दोस्त!

एक साल के अंदर मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मोइज्जू के तेवर कई बार बदले. भारत के खिलाफ नजरें उठाने से लेकर भारत के करीब आने तक, मोहम्मद मोइज्जू ने कई बार कुछ ऐसा किया है, जिसे भारत विरोधी कहा जा सकता है. भारत के लगातार बहिष्कार की वजह से अब उन्हें एक बार फिर अपनी नीतियां बदलनी पड़ी हैं. मोहम्मद मोइज्जू ने विदेश मंत्री एस जयशंकर से मुलाकात की और पुराने रिश्तों को दुरुस्त किया. उन्होंने भारत के साथ बेहतर संबंध की वकालत की है.

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मालदीव को एक बार फिर भारत के साथ पुराने रिश्तों की याद आई है. महीनों के तनाव के बाद, एक बार फिर राष्ट्रपति मोहम्मद मोइज्जू को लगने लगा है कि भारत के बिना, मालदीव का काम नहीं चलेगा. मोहम्मद मोइज्जू ने शनिवार को भारत के विदेशमंत्री एस जयशंकर से मुलाकात की और भारत के साथ अच्छे संबंधों की दुहाई दी. दोनों वाटर सैनिटेशन प्रोजेक्ट के लिए साथ आए और उद्घाटन किया. 28 आइलैंड पर शुरू होने वाले इस प्रोजेक्ट की तारीफ में कसीदे पढ़े. मोहम्मद मोइज्जू को अब लगने लगा है कि भारत से बेहतर मालदीव का कोई दोस्त नहीं है. मोइज्जू ने कहा कि भारत, मालदीव का का निकटम सहयोगी अमूल्य पार्टनर है. 

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा, 'भारत और मालदीव के बीच सहयोग हमारे ध्रुव वाक्य 'इमैजिन्ड बाय मालदीव, डिलीवर्ड बाय इंडिया' पर टिके हैं. यह हमारा प्रयास है कि इस वाक्य को अमल में लाएं और अपने रिश्तों को नए दौर में लेकर जाएं.'

'भारत पर बदल गए हैं मोइज्जू के सुर'

विदेशमंत्री ने कहा, 'मैं आशा करता हूं कि राष्ट्रपति, आपके निर्देश में, हमारे साझा सहयोग से, प्रयास से दोनों देशों के लिए एक नया मील पत्थर तय होगा.' मोहम्मद मोइज्जू ने दोहराया कि वे भारत के साथ प्रतिबद्धता से काम करने के लिए तैयार हैं. उन्होंने कहा कि भारत हमेशा से भारत का निकटम सहयोगी रहा है, जब भी मालदीव को जरूरत पड़ती है भारत मदद के लए तैयार रहता है.'

'अब हिंदुस्तानियों को शुक्रिया कह रहे मोइज्जू'

मोहम्मद मोइज्जू ने भारत, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और देश की जनता को शुक्रिया कहा, जिनकी वजह से मालदीव और भारत के संबंध दशकों से कायम हैं. मोइज्जू ने अपने हालिया दौरे का जिक्र किया और कहा कि पीएम मोदी ने स्वागत किया और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात कराई, यह हमेशा याद रहेगा.' विदेश मंत्री ने भी कहा कि मालदीव हमारे पड़ोसी प्रथम नीति का हिस्सा है. भारत ग्लोबल साउथ को नई दिशा देने के लिए काम कर रहा है. 

कैसे बिगड़े थे भारत और मालदीव के रिश्ते?

जनवरी 2024 से भी भारत और मालदीव के रिश्ते, अप्रत्याशित रूप से खराब हो गए थे. मालदीव के बड़े राजनेताओं में शुमार मालशा शरीफ, मरियम शिउना और अब्दुल्ला माहजून ने कुछ ऐसे विवादित बयान दिए थे, जिसकी वजह से रिश्ते डिरेल हो गए थे. इन तीनों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लक्षद्वीप में एक बीच पर गए थे और कुछ तस्वीरें शेयर की थीं तो मालदीव बौखला गया था. उन्होंने पीएम मोदी को जोकर और इजरायल की कठपुतली बता दी थी. 

मोइज्जू ने खुद बिगाड़े थे रिश्ते, कैसे सुधर गए?

मालदीव ने आनन-फानन में अपने नेताओं को  सस्पेंड कर दिया था. भारत में बायकॉट मालदीव का ट्रेंड शुरू हो गया था. मालदीव की अर्थव्यवस्था लड़खड़ाने लगी थी. मालदीव को जरा सी अकड़ दिखाने पर करोड़ों डॉलर का नुकसान हो गया था. मोहम्मद मोइज्जू को चीन का समर्थक माना जाता है, वे चीन को ज्यादा तरजीह देते हैं. दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद उन्होंने कहा था कि भारत के सैनिकों को हटना होगा. एक बार फिर उन्हें भारत के सामने अपने अड़ियल रुख को छोड़कर, झुकना पड़ा. अब वे पुराने रिश्तों की दुहाई देकर, बेहतर संबंधों की वकालत कर रहे हैं.