मोदी-जिनपिंग की 50 मिनट की मुलाकात, जानें दोनों देशों के बयानों में क्या रहा खास?
नई दिल्ली में BRICS समिट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच करीब 50 मिनट तक अहम बैठक हुई. दोनों देशों ने रिश्तों में सुधार और सीमा पर शांति की जरूरत पर सहमति जताई, लेकिन भारत और चीन के आधिकारिक बयानों में प्राथमिकताओं का अंतर साफ नजर आया.
नई दिल्ली में आयोजित BRICS समिट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच अहम द्विपक्षीय बैठक हुई. करीब 50 मिनट चली इस बातचीत में भारत-चीन संबंधों को आगे बढ़ाने, सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखने तथा व्यापार समेत कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई.
बैठक के बाद भारत और चीन ने अलग-अलग प्रेस रिलीज जारी की. दोनों बयानों में रिश्तों को बेहतर बनाने और सीमा पर शांति कायम रखने की जरूरत पर सहमति दिखाई दी, लेकिन दोनों देशों ने अलग-अलग पहलुओं को ज्यादा महत्व दिया.
चीन ने रिश्तों में आपसी समझ पर दिया जोर
चीन की ओर से जारी बयान में भारत और चीन को एक-दूसरे का प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि सहयोगी और साझेदार मानकर आगे बढ़ने की बात कही गई. बीजिंग ने दोनों देशों के संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक नजरिए से मजबूत करने पर जोर दिया. चीन ने कहा कि दोनों देशों के बीच पिछले दो वर्षों में संवाद और सहयोग बढ़ा है. साथ ही व्यापार में भी प्रगति हुई है. सीमा विवाद को लेकर चीन ने आपसी सम्मान और समझ के जरिए रिश्तों में मौजूद बाधाओं को दूर करने की बात कही. इसके साथ ही सीमा विवाद के समाधान की दिशा में प्रयास जारी रखने पर भी जोर दिया गया.
Also Read
भारत ने सीमा पर शांति को बताया जरूरी आधारभारत के बयान में सीमा पर शांति और स्थिरता को दोनों देशों के संबंधों की आगे की प्रगति के लिए महत्वपूर्ण आधार बताया गया. नई दिल्ली ने स्पष्ट किया कि सीमा से जुड़े मौजूदा समझौतों और दोनों पक्षों के बीच बनी सहमतियों का पूरी तरह पालन किया जाना चाहिए. भारत ने सीमा विवाद के निष्पक्ष, उचित और दोनों पक्षों को स्वीकार्य समाधान की प्रतिबद्धता भी दोहराई. इसके अलावा लोगों के बीच संपर्क, सांस्कृतिक आदान-प्रदान, व्यापार और सीधी उड़ानों को बढ़ावा देने की जरूरत पर भी चर्चा हुई.
मोदी ने रखे तीन 'म्यूचुअल' का फॉर्मूला
बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत-चीन संबंधों के लिए पारस्परिक सम्मान, पारस्परिक संवेदनशीलता और पारस्परिक हित को महत्वपूर्ण बताया. भारत की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया कि दोनों देशों के बीच मतभेद किसी विवाद का रूप नहीं लेने चाहिए. दोनों बयानों को साथ देखें तो रिश्तों में सुधार की इच्छा स्पष्ट है.