Online Betting: केंद्र सरकार ने मंगलवार को ऑनलाइन गेमिंग बिल को मंजूरी दे दी है, जिसका उद्देश्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए होने वाली सट्टेबाजी को अपराध घोषित करना और इसे कंट्रोल करना है. इस बिल के तहत ऑनलाइन सट्टेबाजी को बढ़ावा देने वालों पर भारी जुर्माना और सजा का प्रावधान किया गया है. यह कदम डिजिटल गेमिंग से जुड़े अडिक्शन, धोखाधड़ी और असंगत राज्य नियमों जैसे गंभीर मुद्दों को जाहिर करने के लिए उठाया गया है.
मीडिया रिपोर्ट्स के के मुताबिक, यह प्रस्तावित कानून बुधवार को लोकसभा में पेश किया जा सकता है. समाचार एजेंसी पीटीआई ने एक अज्ञात सूत्र के हवाले से बताया, "कैबिनेट ने असली पैसे से जुड़े ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म को विनियमित करने वाले विधेयक को मंजूरी दे दी है. सरकार बुधवार को संसद में इस विधेयक को पेश करने की कोशिश कर रही है." यह कदम ऑनलाइन सट्टेबाजी से जुड़ी आत्महत्याओं की बढ़ती घटनाओं को रोकने के लिए उठाया गया है, जो हाल के वर्षों में एक बड़ी चिंता का विषय बन चुकी हैं.
क्या कहता है नया विधेयक?
प्रस्तावित कानून के तहत, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म्स की निगरानी के लिए केंद्रीय प्राधिकरण के रूप में नियुक्त किया गया है. यह बिल न केवल अवैध सट्टेबाजी को रोकने पर केंद्रित है, बल्कि यह अडिक्शन और धोखाधड़ी को भी नियंत्रित करेगा. नए आपराधिक कानूनों के तहत, अनधिकृत सट्टेबाजी में संलिप्त लोगों को सात साल तक की जेल की सजा हो सकती है. हालांकि, जुआ राज्य सरकारों के संवैधानिक अधिकार क्षेत्र में आता है, इसलिए प्राथमिक प्रवर्तन का अधिकार राज्यों के पास ही रहेगा.
पहले से लागू हैं सख्त नियम
सरकार ने पहले ही ऑनलाइन गेमिंग पर सख्ती दिखाई है. साल 2023 में ऑनलाइन गेमिंग पर 28% जीएसटी लागू किया गया था, जबकि 2024-25 से जीत की राशि पर 30% टैक्स लगाया गया है. इसके अलावा, 2022 से अब तक 1,400 से अधिक सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म्स को ब्लॉक किया जा चुका है. मंत्रालयों ने अभिभावकों, शिक्षकों और टीवी चैनलों को गेमिंग लत के खतरों के प्रति जागरूक करने के लिए चेतावनियां जारी की हैं. गेमिंग विज्ञापनों में डिस्क्लेमर अनिवार्य करने जैसे कदम भी उठाए गए हैं.
क्यों जरूरी है यह विधेयक?
ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी से जुड़े नकारात्मक प्रभाव, जैसे वित्तीय नुकसान, मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं और आत्महत्याओं की बढ़ती संख्या, ने सरकार को यह कड़ा कदम उठाने के लिए प्रेरित किया है. यह विधेयक न केवल अवैध गतिविधियों पर रोक लगाएगा, बल्कि उपयोगकर्ताओं को सुरक्षित और पारदर्शी डिजिटल गेमिंग अनुभव प्रदान करने में भी मदद करेगा.