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TMC में बगावत की नई आहट, 70 पार्षदों की बैठक से ममता खेमे में बढ़ी बेचैनी

पश्चिम बंगाल में चुनावी झटके के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर असंतोष गहराता दिख रहा है. 70 पार्षदों की ऋतब्रत बनर्जी के साथ बैठक ने नए राजनीतिक समीकरणों और संभावित बगावत की अटकलों को तेज कर दिया है.

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TMC में बगावत की नई आहट, 70 पार्षदों की बैठक से ममता खेमे में बढ़ी बेचैनी
Courtesy: Social Mediaa

नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस एक बार फिर अंदरूनी चुनौतियों से घिरी नजर आ रही है. पार्टी के कई नेताओं और जनप्रतिनिधियों के असंतोष के बीच अब कोलकाता नगर निगम के पार्षदों की बैठक ने सियासी हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है. इस बैठक में पूर्व मेयर फिरहाद हकीम की मौजूदगी ने इसे और महत्वपूर्ण बना दिया है.

सूत्रों के मुताबिक करीब 70 पार्षदों ने ऋतब्रत बनर्जी के साथ बैठक की. इनमें बड़ी संख्या कोलकाता नगर निगम के पार्षदों की बताई जा रही है. बैठक में शामिल नेताओं की राजनीतिक दिशा को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं. माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में पार्टी के भीतर और बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं.

फिरहाद हकीम की मौजूदगी ने बढ़ाई उत्सुकता

बैठक में पूर्व मेयर फिरहाद हकीम की उपस्थिति ने राजनीतिक महत्व को और बढ़ा दिया है. हकीम लंबे समय से ममता बनर्जी के करीबी नेताओं में गिने जाते रहे हैं. हाल के दिनों में उन्हें कई बार ऋतब्रत बनर्जी के साथ देखा गया है. यही वजह है कि उनके रुख को लेकर राजनीतिक गलियारों में लगातार चर्चाएं चल रही हैं.

पहले भी सामने आ चुकी है नाराजगी

तृणमूल कांग्रेस में असंतोष की खबरें नई नहीं हैं. पार्टी के कई विधायक और सांसद पहले ही नेतृत्व के खिलाफ खुलकर सामने आ चुके हैं. बागी नेताओं ने विधानसभा में अलग राजनीतिक पहचान बनाने की दिशा में कदम उठाए हैं. इससे पार्टी नेतृत्व पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है और संगठनात्मक चुनौतियां भी सामने आ रही हैं.

विधानसभा में बदले राजनीतिक समीकरण

ऋतब्रत बनर्जी को विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में मान्यता मिलना सबसे महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है. इस फैसले को चुनौती देने की कोशिश भी हुई, लेकिन अदालत से राहत नहीं मिली. हाई कोर्ट के फैसले के बाद विधानसभा अध्यक्ष का निर्णय प्रभावी बना हुआ है. इससे बागी खेमे की राजनीतिक स्थिति और मजबूत हुई है.

ममता खेमे के सामने नई चुनौती

ताजा घटनाक्रम ने तृणमूल कांग्रेस नेतृत्व के सामने नई राजनीतिक चुनौती खड़ी कर दी है. पार्टी को अब केवल विपक्षी दलों से ही नहीं, बल्कि अंदरूनी असंतोष से भी जूझना पड़ रहा है. आने वाले दिनों में पार्षदों और अन्य नेताओं का रुख पश्चिम बंगाल की राजनीति की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है.