नई दिल्ली: मार्च के अंत में देश के कई हिस्सों में मौसम अचानक बदल गया है. गर्मी आने से पहले ही बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं ने लोगों को चौंका दिया. मौसम विभाग के अनुसार विभिन्न प्रणालियों के कारण उत्तर से दक्षिण और पूर्वोत्तर तक असर देखने को मिल रहा है.
मार्च के अंतिम दिनों में देशभर में मौसम ने अलग मिजाज दिखाया. जहां गर्मी की उम्मीद थी, वहां अचानक बारिश और आंधी ने सबको हैरान कर दिया. उत्तर-पश्चिमी राजस्थान के ऊपर चक्रवाती परिसंचरण और द्रोणियों के प्रभाव से कई राज्यों में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है. आने वाले दिनों में तापमान में उतार-चढ़ाव और ओलावृष्टि का अलर्ट भी जारी है.
30 मार्च और 2-3 अप्रैल के दौरान जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश तथा उत्तराखंड में हल्की से मध्यम बारिश और बर्फबारी हो सकती है. कश्मीर घाटी में 30 मार्च को भारी बारिश-बर्फबारी के साथ ओले गिरने की आशंका है. पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में 31 मार्च को छिटपुट बारिश, गरज-चमक और 30-50 किमी प्रति घंटे की तेज हवाएं चल सकती हैं. दिल्ली में कल सुबह आंशिक बादल रहेंगे, दोपहर में गरज-बिजली के साथ हल्की बारिश संभव है. अधिकतम तापमान 28-30 डिग्री और न्यूनतम 20-22 डिग्री रहने का अनुमान है.
30 मार्च से 2 अप्रैल तक असम, मेघालय में व्यापक बारिश, गरज-चमक और तेज हवाएं चलेंगी. नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा में 31 मार्च को बारिश के साथ आंधी-बिजली का खतरा है. अरुणाचल प्रदेश में भारी बारिश के आसार हैं. उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम, झारखंड और ओडिशा में भी हल्की-मध्यम बारिश, गरज और 40-60 किमी प्रति घंटे की हवाओं का अलर्ट है. 31 मार्च को कुछ जगहों पर ओलावृष्टि संभव है.
मध्य प्रदेश, विदर्भ और छत्तीसगढ़ में 30 मार्च से 2 अप्रैल तक गरज-चमक, बिजली और 30-50 किमी प्रति घंटे की हवाओं के साथ बारिश होगी. पश्चिमी मध्य प्रदेश में 30 मार्च को ओले गिर सकते हैं. मध्य महाराष्ट्र, मराठवाड़ा और गुजरात में भी 30-31 मार्च को बारिश, बिजली और ओलावृष्टि की संभावना है. कोंकण-गोवा में 31 मार्च से 2 अप्रैल तक आकाशीय बिजली गिरने के संकेत हैं.
उत्तर-पश्चिम भारत में 30 मार्च तक अधिकतम तापमान 2-4 डिग्री गिर सकता है. मध्य भारत में 2-4 अप्रैल को 3-5 डिग्री की गिरावट आएगी. पूर्वी भारत में 2 अप्रैल तक तापमान बढ़ने के बाद स्थिर रहेगा. गुजरात और महाराष्ट्र में भी तापमान में मामूली कमी देखी जा सकती है. नए पश्चिमी विक्षोभ के 2 अप्रैल से उत्तर-पश्चिम भारत को प्रभावित करने की संभावना है.