नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2026 की पहली 'मन की बात' में देशवासियों से संवाद करते हुए बीते एक दशक की उपलब्धियों और सामूहिक प्रयासों की ताकत को रेखांकित किया. उन्होंने स्टार्टअप आंदोलन की शुरुआत की यादें साझा कीं और बताया कि कैसे जनभागीदारी से नदियों का पुनर्जीवन और सूखाग्रस्त क्षेत्रों का कायाकल्प संभव हुआ. प्रधानमंत्री का संदेश स्पष्ट था- जब समाज आगे आता है, तो बड़े बदलाव संभव होते हैं.
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सोशल मीडिया पर लोग 2016 की अपनी यादें साझा कर रहे हैं, जिससे उन्हें भी एक महत्वपूर्ण यात्रा याद आई. जनवरी 2016 में शुरू हुई स्टार्टअप पहल भले छोटी लगी हो, लेकिन आज भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है. उन्होंने कहा कि भारतीय स्टार्टअप आज उन क्षेत्रों में काम कर रहे हैं, जिनकी कल्पना एक दशक पहले तक मुश्किल थी.
प्रधानमंत्री ने स्टार्टअप से जुड़े युवाओं की सराहना करते हुए कहा कि वे लीक से हटकर सोच रहे हैं. एआई, अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा, सेमीकंडक्टर और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे क्षेत्रों में भारतीय युवाओं की मौजूदगी देश की नई पहचान बना रही है. उन्होंने गुणवत्ता को सर्वोच्च मानक बनाने पर जोर देते हुए कहा कि भारतीय उत्पाद का अर्थ उत्कृष्टता होना चाहिए.
प्रधानमंत्री मोदी ने अयोध्या से होकर गुजरने वाली तामसा नदी का उल्लेख किया, जो कभी स्थानीय लोगों के जीवन का आधार थी. प्रदूषण के कारण इसका प्रवाह बाधित हो गया था, लेकिन लोगों ने इसे पुनर्जीवित करने का अभियान शुरू किया. सामूहिक प्रयासों और निरंतर मेहनत से नदी को फिर से जीवन मिला, जो जनभागीदारी की शक्ति का उदाहरण है.
प्रधानमंत्री ने आंध्र प्रदेश के अनंतपुर क्षेत्र का उदाहरण देते हुए बताया कि यह इलाका लंबे समय से सूखे की मार झेल रहा था. स्थानीय लोगों ने प्रशासन के सहयोग से 'अनंत नीरू संरक्षणम परियोजना' शुरू की. इसके तहत 10 से अधिक जलाशयों का जीर्णोद्धार किया गया और 7,000 से ज्यादा पेड़ लगाए गए, जिससे इलाके में जल स्थिति में सुधार आया.
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि तामसा नदी और अनंतपुर जैसे उदाहरण दिखाते हैं कि जब लोग खुद जिम्मेदारी लेते हैं, तो हालात बदलते हैं. उन्होंने देशवासियों से अपील की कि वे अपने आसपास के संसाधनों की रक्षा करें और विकास में भागीदार बनें. उनका संदेश था कि सामूहिक प्रयास ही भारत को मजबूत और आत्मनिर्भर बनाएंगे.