उद्धव सेना को बड़ा झटका, 6 बागी सांसदों के शिंदे गुट में विलय को स्पीकर की मंजूरी

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शिवसेना (UBT) के छह सांसदों के एकनाथ शिंदे गुट में विलय को मान्यता दे दी है.

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Ashutosh Rai

महाराष्ट्र की राजनीति में एक और बड़ा बदलाव सामने आया है. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शिवसेना (UBT) के छह सांसदों के एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में विलय को मंजूरी दे दी है. इस फैसले के बाद संसद में दोनों गुटों की ताकत का नया गणित सामने आ गया है.

स्पीकर के फैसले से बदला लोकसभा का समीकरण

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने शिवसेना (यूबीटी) से अलग हुए छह सांसदों के आवेदन को स्वीकार करते हुए उनके एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में विलय को आधिकारिक मान्यता दे दी है. इन सांसदों ने पहले लोकसभा सचिवालय में आवेदन देकर खुद को शिंदे गुट का हिस्सा मानने की मांग की थी. मंजूरी मिलने के बाद अब लोकसभा में इन सभी सांसदों की पहचान शिंदे गुट के सांसदों के रूप में होगी. इस फैसले से संसद में शिवसेना (यूबीटी) का प्रतिनिधित्व घट गया है. वहीं शिंदे गुट की संख्या बढ़ गई है. राजनीतिक जानकार इसे महाराष्ट्र की राजनीति में एक अहम मोड़ मान रहे हैं, क्योंकि इससे दोनों गुटों की ताकत का संतुलन बदल गया है.

यूबीटी को झटका

लोकसभा चुनाव 2024 में उद्धव ठाकरे की पार्टी के नौ सांसद चुने गए थे. वहीं एकनाथ शिंदे की शिवसेना के सात सांसद संसद पहुंचे थे. अब छह सांसदों के विलय के बाद उद्धव ठाकरे गुट के पास सिर्फ तीन सांसद रह गए हैं. वहीं शिंदे गुट की संख्या बढ़कर 13 हो गई है. जिन सांसदों ने गुट बदला है, उनमें संजय देशमुख, संजय जाधव, संजय दीना पाटिल, नागेश पाटिल-अष्टीकर, ओमप्रकाश राजे निंबालकर और भाऊसाहेब वाकचौरे शामिल हैं. इस बदलाव को शिंदे गुट के लिए बड़ी राजनीतिक सफलता माना जा रहा है. वहीं, उद्धव ठाकरे गुट के लिए यह एक बड़ा झटका माना जा रहा है.


एनडीए को मिला फायदा

यह फैसला 2022 में शिवसेना में हुई बड़ी टूट के बाद शुरू हुई राजनीतिक और कानूनी प्रक्रिया का नया पड़ाव माना जा रहा है. एकनाथ शिंदे पहले ही दावा कर चुके थे कि छह सांसदों का उनकी पार्टी में शामिल होना संविधान की दसवीं अनुसूची यानी दल-बदल विरोधी कानून के नियमों के मुताबिक है. उनके अनुसार, दो-तिहाई बहुमत के साथ हुए इस विलय में सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया गया. दूसरी ओर, उद्धव ठाकरे गुट ने इस दावे का विरोध किया था और कहा था कि सिर्फ संसदीय दल का बहुमत पर्याप्त नहीं है. हालांकि, स्पीकर के फैसले ने शिंदे गुट के दावे को मजबूती दी है. संसद का मानसून सत्र शुरू होने से ठीक पहले आए इस फैसले से लोकसभा में बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए की संख्या भी और मजबूत हो गई है.