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Lok Sabha Elections 2024: पुराने दलों की क्यों घर वापसी करा रही है NDA, जानें TDP के साथ गठबंधन से कितना फायदा

Lok Sabha Election 2024: आंध्र प्रदेश में चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व वाली तेलुगु देशम पार्टी ने भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए से हाथ मिलाया है. ऐसे में ये जानना बेहद जरूरी है कि दोनों पार्टियों ने आखिर क्यों हाथ मिलाया है?

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Lok Sabha Elections 2024: पुराने दलों की क्यों घर वापसी करा रही है NDA, जानें TDP के साथ गठबंधन से कितना फायदा

Lok Sabha Election 2024: तेलुगु देशम पार्टी (TDP) करीब छह महीने के बाद फिर से भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए में शामिल हो गई है. छह महीने दोनों का विभाजन इस बात पर हुआ था कि केंद्र की भाजपा सरकार ने आध्र प्रदेश को विशेष श्रेणी का दर्जा नहीं दिया था. इसके कारण दोनों का गठबंधन टूट गया था. ऐसे में सवाल उठता है कि लोकसभा चुनाव से पहले टीडीपी का एनडीए में फिर से वापस आना क्यों हुआ है?

आंध्र प्रदेश में पहले ही अभिनेता से नेता बने पवन कल्याण की जन सेना पार्टी (जेएसपी) के साथ गठबंधन करने से चंद्रबाबू नायडू की पार्टी को आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनावों में काफी उम्मीदें हैं. साथ ही उम्मीद है कि सीट-बंटवारा भी आने वाले कुछ ही दिनों में हो सकता है. 

चंद्रबाबू नायडू एनडीए में क्यों लौटे?

पिछले नवंबर में महसूस किया जा रहा था कि चंद्रबाबू नायडू राजनीतिक करियर की गुमनामी में जा सकते है. 73 वर्षीय नायडू ने एक रैली में मतदाताओं से भावनात्मक अपील की थी. उन्होंने अपने समर्थकों से कहा था कि अगर टीडीपी सत्ता में नहीं आई तो यह (2024) मेरा आखिरी चुनाव होगा.

टीडीपी सुप्रीमो की अपील उन खबरों के बीच आई है कि टीडीपी-जेएसपी गठबंधन सत्तारूढ़ वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) को सत्ता से हटाने में सक्षम नहीं हो सकता है. भले ही वाईएस जगन मोहन रेड्डी के नेतृत्व वाले संगठन ने सत्ता विरोधी लहर से निपटने के लिए जीतने लायक उम्मीदवारों की जगह ले ली हो. भाजपा को साथ लाकर नायडू को वाईएसआरसीपी विरोधी मतदाताओं को एकजुट करने की उम्मीद है, जिनका सत्तारूढ़ दल से मोहभंग हो गया है, लेकिन वे किसी नतीजे पर नहीं हैं. 

ऐसे जानिए कब-क्या हुआ?

पूर्व की बात करें तो चुनावी तौर पर भी टीडीपी ने बीजेपी के साथ गठबंधन में बेहतर प्रदर्शन किया है. साल 2014 के लोकसभा चुनावों में पार्टी ने 40% से ज्यादा वोट शेयर के साथ राज्य की 25 में से 15 सीटें जीती थीं. हालांकि साल 2019 में एनडीए से बाहर निकलने के बाद पार्टी तीन सीटों पर सिमट गई. 2014 में टीडीपी-बीजेपी गठबंधन विधानसभा चुनावों में सत्ता में आया, जिसमें नायडू के नेतृत्व वाली पार्टी ने 175 सीटों में से 102 सीटें जीतीं. पांच साल बाद जब वह अकेले चुनाव लड़ी, तो ये संख्या घटकर 23 रह गई.

गठबंधन से बीजेपी को क्या मिलेगा?

पार्टी की राज्य में काफी कम सीटें हैं. साल 2019 के लोकसभा चुनावों में कोई फायदा नहीं हुआ और उसे केवल 0.98% वोट मिले, जो कि NOTA के 1.5% से भी कम थे. साल 2014 में टीडीपी के साथ गठबंधन में पार्टी ने 2% वोट हासिल किए और दो लोकसभा सीटें जीतीं. टीडीपी-जेएसपी गठबंधन के सहयोग से राष्ट्रीय पार्टी को आंध्र में ज्यादा से ज्यादा सीटें जीतने की उम्मीद है, जो 370 लोकसभा सीटें जीतने के लक्ष्य में एक बड़ी मदद साबित होगी. 

क्या है बीजेपी का गणित?

भाजपा ने आखिरकार टीडीपी को एनडीए में वापस लाने के लिए सहमत होने में अपना समय लिया और बार-बार कहा कि वह कोई भी निर्णय लेने से पहले राज्य में राजनीतिक स्थिति का आकलन कर रही है. सूत्रों का दावा है कि बीजेपी को यह एहसास है कि टीडीपी-जेएसपी गठबंधन को बढ़ावा देने और वाईएसआरसीपी विरोधी वोटों के विभाजन को रोकने से जगन सरकार को गिराने में मदद मिल सकती है, जिसके बाद वह गठबंधन के साथ आगे बढ़ी.