आज है लाल शास्त्री जी की पुण्यतिथि, जानें कब और कहां हुई थी उनकी रहस्यमयी मौत
लाल बहादुर शास्त्री का जीवन संघर्ष, सादगी और राष्ट्रभक्ति से भरा रहा. श्रीवास्तव से शास्त्री बनने तक का उनका सफर प्रेरणादायक है. 1965 के युद्ध और जय जवान जय किसान के नारे से उन्होंने देश को नई दिशा दी.
नई दिल्ली: भारत के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की 11 जनवरी यानी आज पुण्यतिथि है. उनका जीवन संघर्ष, सादगी और देशभक्ति की ऐसी मिसाल है जो आज भी हर भारतीय को प्रेरणा देती है.लाल बहादुर शास्त्री का जन्म उत्तर प्रदेश के मुगलसराय में एक साधारण परिवार में हुआ था. उनका मूल नाम लाल बहादुर श्रीवास्तव था.
बहुत कम उम्र में पिता का साया उठ जाने के बाद उनकी परवरिश ननिहाल में हुई. आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने शिक्षा नहीं छोड़ी और कठिन परिस्थितियों में आगे बढ़ते रहे. वाराणसी के हरिश्चंद्र हाई स्कूल में पढ़ाई के दौरान उनके गुरु निष्कामेश्वर प्रसाद मिश्र ने उनमें देशभक्ति की भावना जगाई.
कब मिली उन्हें शास्त्री की उपाधि?
महात्मा गांधी के आह्वान पर मात्र 16 वर्ष की आयु में उन्होंने पढ़ाई छोड़कर स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लिया. बाद में उन्होंने काशी विद्यापीठ से दर्शनशास्त्र और नैतिकता में स्नातक की पढ़ाई पूरी की. इसी दौरान उन्हें शास्त्री की उपाधि मिली, जो आगे चलकर उनकी पहचान बन गई. देश की आजादी के लिए उन्हें कई बार जेल भी जाना पड़ा.
आजाद भारत में शास्त्री जी ने राजनीति में कदम रखा और उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री बने. परिवहन मंत्री रहते हुए उन्होंने महिला कंडक्टरों की नियुक्ति कर समाज में बदलाव की शुरुआत की. केंद्र सरकार में रेल मंत्री रहते हुए एक रेल दुर्घटना की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए उन्होंने इस्तीफा दे दिया.
कब बने प्रधानमंत्री?
यह कदम आज भी ईमानदारी और जवाबदेही की मिसाल माना जाता है. जब 1964 में जवाहरलाल नेहरू का निधन हो गया उसके बाद शास्त्री जी भारत के दूसरे प्रधानमंत्री बने. उनका कार्यकाल चुनौतियों से भरा रहा, जिसमें खाद्यान्न संकट और सुरक्षा खतरे शामिल थे.
1965 का भारत-पाक युद्ध
1965 में पाकिस्तान ने भारत पर हमला किया. ऐसे कठिन समय में शास्त्री जी ने जय जवान जय किसान का नारा दिया. इस नारे ने देश के सैनिकों और किसानों में नया जोश भर दिया. भारतीय सेना ने उनके नेतृत्व में पाकिस्तान को कड़ा जवाब दिया और युद्ध में मजबूती दिखाते हुए पाक को करारी शिकस्त दी और धूल चटा दी.
शास्त्री जी का निधन?
युद्ध के बाद शांति समझौते के लिए शास्त्री जी ताशकंद गए. 10 जनवरी 1966 को भारत और पाकिस्तान के बीच ताशकंद समझौता हुआ लेकिन समझौते के कुछ ही घंटों बाद 11 जनवरी की रात शास्त्री जी का निधन हो गया. सरकारी तौर पर मौत का कारण हार्ट अटैक बताया गया. हालांकि आज भी उनकी मौत को लेकर कई सवाल उठते हैं. उनका जीवन और रहस्यमयी निधन भारतीय इतिहास की सबसे चर्चित घटनाओं में से एक बना हुआ है.