'मैं अभागा सवर्ण हूं…', UGC के नए नियम के खिलाफ सवर्ण समाज के गुस्से के बीच आई कुमार विश्वास की प्रतिक्रिया

यूजीसी के नए नियमों को लेकर देशभर में विवाद तेज हो गया है. कवि कुमार विश्वास की 'अभागा सवर्ण' टिप्पणी ने बहस को और धार दी, जबकि छात्र संगठनों और सरकार के बीच टकराव जारी है.

social media
Kuldeep Sharma

नई दिल्ली: उच्च शिक्षा से जुड़े यूजीसी के नए नियमों ने देश की सियासत और सामाजिक विमर्श को गरमा दिया है. जहां सरकार इसे समानता की दिशा में कदम बता रही है, वहीं विरोधी इसे विभाजनकारी मान रहे हैं. इस बहस में कवि कुमार विश्वास की एंट्री ने मुद्दे को और संवेदनशील बना दिया. सोशल मीडिया पर उनकी पोस्ट वायरल है, जिसमें उन्होंने खुद को 'अभागा सवर्ण' बताते हुए नियमों को वापस लेने की मांग का समर्थन किया.

यूजीसी के नए नियम और विवाद की जड़

यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन ने उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के लिए नये नियम लागू करने का प्रस्ताव रखा है. इन नियमों के तहत हर विश्वविद्यालय और कॉलेज में इक्विटी कमेटी बनाना अनिवार्य होगा. उद्देश्य कैंपस में जातिगत भेदभाव रोकना बताया गया है. हालांकि, कई छात्र संगठन और सामाजिक समूह इसे एकतरफा और वर्गीकरण को बढ़ावा देने वाला कदम मान रहे हैं.

कुमार विश्वास की पोस्ट ने क्यों बढ़ाई हलचल

कवि कुमार विश्वास ने फेसबुक पर एक कविता साझा की, जिसमें पंक्तियां थीं- 'मैं अभागा सवर्ण हूं…'. पोस्ट के साथ #UGC_RollBack हैशटैग जोड़कर उन्होंने साफ संकेत दिया कि वे इन नियमों के खिलाफ हैं. यह कविता मूल रूप से कवि रमेश रंजन मिश्र की है, लेकिन कुमार विश्वास के समर्थन से यह बयान राजनीतिक और सामाजिक बहस का केंद्र बन गया.

UGC हेडक्वार्टर पर छात्रों का प्रदर्शन

दिल्ली स्थित यूजीसी मुख्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन जारी है. सवर्ण आर्मी सहित कुछ छात्र संगठनों ने नियमों को तत्काल वापस लेने की मांग की है. प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सरकार इन नियमों के जरिए समाज में विभाजन पैदा कर रही है. संगठन के नेताओं का कहना है कि कई छात्रों को प्रदर्शन स्थल तक पहुंचने से रोका गया.

यूजीसी का पक्ष, समानता की कोशिश

यूजीसी का कहना है कि नए नियम किसी वर्ग के खिलाफ नहीं हैं. आयोग के मुताबिक, इक्विटी कमेटी का मकसद एससी, एसटी, ओबीसी, दिव्यांग और महिला छात्रों की शिकायतों का समयबद्ध समाधान करना है. साथ ही, कैंपस में समान अवसर और सुरक्षित माहौल सुनिश्चित करना इन समितियों की प्राथमिक जिम्मेदारी होगी.

सरकार का आश्वासन और आगे की राह

सरकारी सूत्रों के अनुसार, यूजीसी नियमों को लेकर फैले भ्रम को दूर करने के लिए जल्द ही आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी किया जाएगा. सरकार का दावा है कि नियमों का दुरुपयोग किसी भी हालत में नहीं होने दिया जाएगा. बजट सत्र से पहले यह मुद्दा राजनीतिक रंग ले सकता है, ऐसे में आने वाले दिनों में इस बहस के और तेज होने की संभावना है.