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'5 करोड़ तो दे देंगे, आगे TISS से कोई लेना-देना नहीं...', समझिए विवाद के बाद टाटा ग्रुप ने ऐसा क्यों कहा?

Tata Group Controversy: टाटा ट्रस्ट के सूत्रों ने कहा है कि हालांकि, ट्रस्ट ने TISS की ओर से चैरिटी प्रमाणपत्र जारी करने पर 5 करोड़ रुपये का शेष अनुदान देने पर सहमति जताई है. TISS ने आज तक प्रमाणपत्र प्रदान नहीं किया है. इसके बावजूद, टाटा ट्रस्ट ने 5 करोड़ रुपये का शेष भुगतान करने पर सहमति व्यक्त की है. जून 2023 से TISS अब टाटा ट्रस्ट के प्रबंधन के अधीन नहीं है. उनका कोई भी प्रतिनिधि बोर्ड में भी नहीं है.

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Tata Group Controversy: टाटा ट्रस्ट ने वेतन के लिए 5 करोड़ रुपये का बकाया देने पर सहमति जता दी है, लेकिन ये भी कहा है कि अब उनका टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज यानी TISS से आगे कोई संबंध नहीं होगा. रिपोर्ट्स के मुताबिक, टाटा ट्रस्ट्स की ओर से 1936 में स्थापित देश का सबसे बड़ा चैरिटेबल ट्रस्ट 'टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS)' अब उनकी ओर सेे समर्थित नहीं होगा. टाटा ट्रस्ट्स के सूत्रों ने दावा किया कि वे केवल सामाजिक परियोजनाओं का हिस्सा होंगे, जहां उनकी बात सुनी जाएगी, न कि जहां उनका कोई प्रतिनिधित्व नहीं है.

एसोसिएशन के ज्ञापन के माध्यम से, TISS को इस वर्ष की शुरुआत में केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के दायरे में लाया गया था. केंद्र से 50% से अधिक अनुदान प्राप्त करने वाले सभी यूनिवर्सिटीज के लिए यूजीसी के नियमों के बाद इसे लागू किया गया था. उस वक्त मीडिया रिपोर्ट्स में TISS के संगठनात्मक ढांचे में बदलाव के बारे में बताया था, इसका असर अब ही देखने को मिला है. दरअसल, टाटा ट्रस्ट की ओर सेे सीधे वित्तपोषित 115 कर्मचारियों (55 टीचिंग और 60 नॉन टीचिंग स्टाफ्स) का कॉन्ट्रैक्ट समाप्त हो गया. 

बकाया जारी होने के बाद सामूहिक बर्खास्तगी के नोटिस वापस

ट्रस्ट की ओर सेे उनके वेतन के लिए धनराशि जारी करने की प्रतिबद्धता के बाद, रविवार को TISS प्रशासन ने अपने चारों परिसरों के कर्मचारियों को जारी सामूहिक बर्खास्तगी नोटिस वापस ले लिए. हालांकि इन शिक्षकों को कुछ समय के लिए अपने रिजर्व फंड से वेतन दिया गया था. 2017 में भी शिक्षकों को सामूहिक बर्खास्तगी पत्र दिए गए थे और बाद में उन्हें वापस ले लिया गया था. 

एक टीचर ने कहा कि ये छह महीने में फिर से दोहराया जा सकता है. हम इस समस्या का दीर्घकालिक समाधान चाहते हैं. मैनेजमेंट कॉन्ट्रैक्ट वाले टीचर्स को प्रोजेक्ट स्टाफ़ कह रहा है क्योंकि वेतन UGC अनुदान से वित्त पोषित नहीं है. लेकिन शिक्षकों की भर्ती एक उचित प्रक्रिया के माध्यम से की जाती है, उन्हें नियुक्ति पत्र दिए जाते हैं, उन्हें एक स्केल पर रखा जाता है और एक भविष्य निधि संख्या दी जाती है.

उन्होंने कहा कि ये टीचर NAAC और NIRF रैंकिंग को दिए गए डेटा का भी हिस्सा हैं. शिक्षक पूर्णकालिक कर्मचारियों जितना ही काम कर रहे हैं. एक बेहतर समाधान यह होगा कि योग्य कर्मचारियों को UGC के रिक्त पदों पर समायोजित किया जाए.

टीचरों को फिर से काम पर लौटने को कहा

TISS के एक अधिकारी ने कहा कि वे इन कर्मचारियों के लिए फंड जारी करने के लिए टाटा ट्रस्ट के साथ चर्चा कर रहे हैं. अधिकारी ने कहा कि वे इस मुद्दे को हल करने के लिए संसाधन उपलब्ध कराने पर सहमत हुए हैं. इसके बाद, जारी किए गए नोटिस वापस ले लिए गए हैं और शिक्षकों को फिर से काम पर आने के लिए कहा गया है. ट्रस्ट की ओर सेे फंड जारी होते ही वेतन दिया जाएगा. "हम सरकार और यूजीसी के नियमों और संस्थान की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए परियोजना और इन कर्मचारियों की स्थायी योजनाओं के लिए टाटा ट्रस्ट के साथ चर्चा करेंगे.