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चुनाव के बाद कहीं 'राजधानी' न बन जाए जम्मू-कश्मीर? मनोज सिन्हा और सरकार के बीच 'दिल्ली' जैसी हो सकती है तकरार!

Jammu and Kashmir Assembly Election 2024: जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव के ऐलान के बाद सभी पार्टियां चुनावी तारीखों का बेसब्री से इंतजार कर रही हैं. सरकार बनाने के लिए पार्टियों ने गुणा-गणित शुरू कर दिया है. तीन चरणों में होने वाले विधानसभा चुनाव का परिणाम 4 अक्टूबर को आएगा. चुनावी परिणाम के बाद जो नई सरकार बनेगी वह जम्मू-कश्मीर के लोगों को एक नया अनुभव देगी. क्योंकि जिस तरह की नई सरकार बनेगी वैसी सरकार शायद ही घाटी के लोगों ने देखी हो?

Gyanendra Tiwari
चुनाव के बाद कहीं 'राजधानी' न बन जाए जम्मू-कश्मीर? मनोज सिन्हा और सरकार के बीच 'दिल्ली' जैसी हो सकती है तकरार!
Courtesy: Social Media

Jammu and Kashmir Assembly Election 2024: 2019 में केंद्र सरकार ने संसद के जरिए जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35 ए को खत्म कर उसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांट दिया था. लद्दाख को अलग करके उसे केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया और ये कहा गया कि अभी जम्मू-कश्मीर भी केंद्र शासित प्रदेश रहेगा. आगे चलकर इसे राज्य का दर्ज दिया जाएगा.  विधानसभा चुनाव का बिगुल तो बच चुका है लेकिन ये चुनाव केंद्र शासित प्रदेश कहे जाने वाले जम्मू और कश्मीर में हो रहा है. यानी विधानसभा चुनाव तो होंगे. सरकार भी बनेगी लेकिन दिल्ली की तरह. जैसे दिल्ली में पुलिस से लेकर सिविल सेवा अधिकारियों की नियुक्ति और तबादले जैसे फैसले राज्यपाल लेते हैं उसी तरह जम्मू में सुरक्षा व्यवस्था से लेकर कई बड़े निर्णय राज्यपाल के जरिए लिए जाएंगे.

अनुच्छेद 370 खत्म होने के 5 साल बाद सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद केंद्र शासित प्रदेश में विधानसभा चुनाव कराए जा रहे हैं. दिसंबर 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने 30 सिंतबर 2024 तक चुनाव कराने का आदेश दिया था. 16 अगस्त को चुनाव आयोग ने जम्मू-कश्मीर में तीन चरणों में विधानसभा चुनाव सपन्न कराने की अधिसूचना जारी की. 18 सितंबर, 25 सितंबर और 1 अक्टूबर को वोट डाले जाएंगे. 4 अक्टूबर को जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव के नतीजे आएंगे. लेकिन नतीजे आने के बाद सरकार और उप राज्यपाल में तकरार जैसी स्थिति देखने को मिल सकती है. 

4 अक्टूबर के बाद कैसा हो जाएगा जम्मू-कश्मीर का शासन और प्रशासन?

4 अक्टूबर को जम्मू-कश्मीर के विधानसभा चुनाव के नतीजे आएंगे. नतीजों में अगर बीजेपी सरकार बना लेती है तो कोई दिक्कत नहीं. क्योंकि केंद्र में बीजेपी की सरकार है. ऐसे में वहां उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और सराकर के बीच समन्वय बना रहेगा. वहीं, अगर बीजेपी के उलट कोई दूसरी पार्टी बहुमित में आती है तो राज्यपाल और सरकार के बीच तकरार देखने को मिल सकती है. इसका उदाहरण दिल्ली है. जिस तरह से दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार है. दिल्ली के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना है. सरकार और उपराज्यपाल के बीच किसी न किसी बात को लेकर तकरार चलती रहती है. 

बढ़ाई गई उपराज्यपाल की शक्तियां

विधानसभा चुनाव से ठीक पहले गृह मंत्रालय ने उप राज्यपाल की शक्तियों में इजाफा कर दिया. 12 जुलाई को भारत सरकार द्वारा प्रकाशित एक नोटिफिकेशन में इसका उल्लेख किया गया है. यानी 4 अक्टूबर के बाद जो भी मुख्यमंत्री बनेगा और जो उसका मंत्रीमंडल होगा उसकी शक्तियां सीमित होंगी. अधिकतर प्रशासनिक ताकत उपराज्यपाल के पास रहेंगी. 

उपराज्यपाल के कौन-कौन सी शक्तियां?

  • 4 अक्टूबर को चुनावी नतीजों के बाद जो भी सरकार बनेगी उसे दिल्ली सरकार की तरह काम करना पड़ेगा. यानी पुलिस से लेकर सिविल सेवा के अधिकारियों के तबादले और नियुक्ति के अधिकार उपराज्यपाल के पास ही रहेंगे. पुलिस सरकार के बाहर रहेगी. 
     
  • मंत्रियों के कार्यक्रम और उनके बैठकों के एजेंडे भी उपराज्यपाल के दफ्तर को 2 दिन पहले देने होंगे. अगर कोई भी मंत्री सरकार की ओर से अगर कोई महत्वपूर्ण बैठक करने वाला है तो उसे उपराज्यपाल को इसकी सूचना 48 घंटे पहले देनी होगी. 
     
  • एंटी करप्शन ब्यूरो, जम्मू-कश्मीर फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी और जेल जैसे प्रमुख और अहम विभाग भी उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के पास ही रहेंगे. 
     
  • सावर्जनिक व्यवस्था को लेकर जम्मू-कश्मीर विधानसभा में कोई कानून नहीं बनाया जा सकता. समवर्ती सूची में आने वाले विषयों पर विधानसभा को कानून बनाने का अधिकार नहीं होगा. 
     
  • किसी के खिलाफ मुकदमा चलाना है या नहीं इसका फैसला उपराज्यपाल ही करेंगे. इतना ही जम्मू कश्मीर की चुनी हुई जो नई सरकार होगी उसकी कैबिनेट मीटिंग में उपराज्यपाल के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे. यानी मंत्रीमंडल में भी उपराज्यपाल का दखल होगा. 

जम्मू-कश्मीर के लोगों के लिए होगा नया अनुभव

4 अक्टूबर को यह साफ हो जाएगा कि आखिर जम्मू-कश्मीर का मुख्यमंत्री किस पार्टी का होगा. कौन सा गठबंधन मिलकर सरकार बना रहा है. बीजेपी अगर छोटी पार्टियों के साथ मिलकर सरकार बनाती है तो दिल्ली की तरह शायद ही सरकार और उपराज्यपाल के बीच नोक झोक देखने को मिले. लेकिन अगर पीडीपी, नेशनल कॉन्फ्रेंस या फिर कांग्रेस मिलकर गठबंधन की सरकार बनाती है तो एक अलग ही तरह की सरकार देखने को मिल सकती है. कुछ भी नई सरकार जम्मू-कश्मीर के लोगों के लिए एक नया अनुभव जरूर देगी.