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'वह किसे बचा रहे हैं?' CJI चंद्रचूड़ ने आरजी कर अस्पताल के प्रिंसिपल के तबादले पर उठाए सवाल

Supreme Court: कोलकाता के एक सरकारी अस्पताल के सेमिनार हॉल में जूनियर डॉक्टर के साथ रेप और मर्डर की घटना ने देश भर में विरोध प्रदर्शन को जन्म दे दिया है. भारी विरोध प्रदर्शन के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले का स्वत: संज्ञान लेते हुए सुनवाई शुरू की है.

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'वह किसे बचा रहे हैं?' CJI चंद्रचूड़ ने आरजी कर अस्पताल के प्रिंसिपल के तबादले पर उठाए सवाल
Courtesy: Social Media

Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में ट्रेनी डॉक्टर के साथ रेप और मर्डर की जांच के तरीके पर चिंता जताई है. कोर्ट ने एफआईआर दर्ज करने में कथित तौर पर 14 घंटे की देरी पर ममता सरकार को फटकार भी लगाई है. 

कोलकाता घटना की स्वत: सुनवाई करते हुए भारत के मुख्य न्यायाधीश  डी.वाई. चंद्रचूड़ ने कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. संदीप घोष के कार्यों की भी जांच की और दूसरे कॉलेज में उनके ट्रांसफर का कारण पूछा. 

सीजेआई ने पूछे ये सवाल 

सीजेआई चंद्रचूड़ ने पूछा (ए) एफआईआर दर्ज होने में 14 घंटे की देरी का क्या कारण है ? (बी) कॉलेज के प्रिंसिपल को सीधे कॉलेज आकर एफआईआर दर्ज करानी चाहिए थी, वह किसे बचा रहे हैं? (सी) उन्होंने इस्तीफा दे दिया था फिर उन्हें दूसरे कॉलेज का कार्यभार कैसे सौंपा गया?  सुप्रीम कोर्ट के हालिया प्रश्न इस घटना की पारदर्शिता और जवाबदेही की बढ़ती मांग के बीच आए हैं. 

विरोध के बाद झुकी सरकार

आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के पूर्व प्रिंसिपल डॉक्टर संदीप घोष को 31 वर्षीय पोस्ट ग्रेजुएट ट्रेनी डॉक्टर के रेप और मर्डर के बाद कलकत्ता नेशनल मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में प्रिंसिपल के रूप में ट्रांसफर कर दिया गया था.  हालांकि, राज्य सरकार ने बुधवार को विरोध प्रदर्शन कर रहे जूनियर डॉक्टरों की मांग के आगे झुकते हुए उनकी पोस्टिंग रद्द कर दी. 


सुप्रीम कोर्ट में सीबीआई ने क्या कहा?

सीबीआई ने गुरुवार को सर्वोच्च न्यायालय में कहा कि अपराध को छुपाने का प्रयास किया गया था क्योंकि जब केंद्रीय एजेंसी ने जांच अपने हाथ में ली तब तक क्राइम सीन बदला जा चुका था. सीबीआई की ओर से अदालत में पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ से कहा कि हमने पांचवें दिन जांच शुरू की.  उससे पहले स्थानीय पुलिस ने जो भी इकट्ठा किया था वह हमें दे दिया.  जांच अपने आप में एक चुनौती थी, क्योंकि अपराध स्थल को बदल दिया गया था. एफआईआर (पीड़िता के) अंतिम संस्कार के बाद रात 11:45 बजे दर्ज की गई. 

क्या बोले ममता सरकार के वकील? 

पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने मेहता की दलीलों का विरोध करते हुए कहा कि हर चीज की वीडियोग्राफी की गई थी और अपराध स्थल पर कुछ भी नहीं बदला गया था.  सिब्बल ने कहा कि कोलकाता पुलिस ने प्रक्रिया का पूरी ईमानदारी से पालन किया और सीबीआई की स्थिति रिपोर्ट केवल मामले को उलझाने का प्रयास करती है.