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केंद्र सरकार SIR पर चर्चा को तैयार लेकिन टाइमलाइन पर विपक्ष ना दे जोर, संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने संसद में गतिरोध पर दिया बयान

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने खड़गे की मांग पर जवाब देते हुए कहा कि इस तरह दबाव डालकर चर्चा नहीं कराई जा सकती. रिजिजू ने कहा कि सरकार पहले ही इस मामले पर 'कंसल्टेशन प्रक्रिया' शुरू कर चुकी है.

Anuj
Edited By: Anuj
केंद्र सरकार SIR पर चर्चा को तैयार लेकिन टाइमलाइन पर विपक्ष ना दे जोर, संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने संसद में गतिरोध पर दिया बयान

नई दिल्ली: संसद का शीतकालीन सत्र शुरू हो गया है, जो 19 दिसंबर तक चलेगा. विपक्ष SIR मुद्दे पर तुरंत चर्चा कराने की मांग पर जोर दे रहा है. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि यह बहुत महत्वपूर्ण और तुरंत ध्यान देने वाला मामला है, इसलिए इस पर तुरंत चर्चा होनी चाहिए.

वहीं, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने खड़गे की मांग पर जवाब देते हुए कहा कि इस तरह दबाव डालकर चर्चा नहीं कराई जा सकती. रिजिजू ने कहा कि सरकार पहले ही इस मामले पर 'कंसल्टेशन प्रक्रिया' शुरू कर चुकी है.

'सरकार पीछे नहीं हटेगी'

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार विपक्ष के नेताओं से बातचीत कर रही है और सभी की बात सुनी जाएगी. उन्होंने कहा कि चुनाव सुधार हो या कोई भी बड़ा मुद्दा, सरकार पीछे नहीं हटेगी. रिजिजू ने सदन में चल रहे शोर-शराबे पर नाराजगी जताते हुए कहा कि यह हंगामा और नारेबाजी सही तरीका नहीं है.

'टाइमलाइन तय करने का दबाव न डालें'

उन्होंने विपक्ष से कहा कि बार-बार चर्चा की टाइमलाइन तय करने का दबाव न डालें. सरकार अलग-अलग विपक्षी दलों के फ्लोर लीडर्स से बातचीत कर रही है और जल्द ही कोई फैसला लिया जाएगा. रिजिजू ने यह भी कहा कि समस्या तब पैदा होती है, जब विपक्ष समय सीमा तय करने की जिद करता है. उन्होंने आरोप लगाया कि जब विपक्ष चुनाव नहीं जीत पाता तो अपनी नाराजगी सदन में हंगामा करके निकालता है, जो ठीक नहीं है. उन्होंने कहा कि 'अभी बताओ' वाला तरीका लोकतांत्रिक प्रक्रिया के हिसाब से सही नहीं है.

प्रियंका गांधी ने साधा निशाना

कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा कि नरेंद्र मोदी सरकार और चुनाव आयोग मिलकर SIR के जरिये 'वोट चोरी' को अंजाम दे रहे हैं. यह हमारे करोड़ों दलित, पिछड़े, आदिवासी और वंचित भाई-बहनों से वोट का ​अधिकार छीनने का संगठित प्रयास है.

जितने भी सवाल उठ रहे हैं, चुनाव आयोग किसी सवाल का जवाब नहीं दे रहा है और सरकार खुलकर आयोग का बचाव कर रही है. यह लोकतंत्र व संविधान को खत्म करने और तानाशाही स्थापित करने की साजिश है. हम यह कतई नहीं होने देंगे.